katniLatestमध्यप्रदेश

कटनी में पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया कजलियां, लोगों ने एक दूसरे को दीं शुभकामनाएं

कटनी में पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया कजलियां, लोगों ने एक दूसरे को दीं शुभकामनाएं

कटनी जिले में आज कजलियां पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। लोक पर्व कजलियां मंगलवार को कटनी जिले में पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कजलियां की धूम शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में रही। कटनी में गाटर घाट मार्ग में इस अवसर पर मेले का पारंपरिक आयोजन किया गया। कजलियां मेले का शुभारंभ महापौर प्रीति सूरी ने किया तथा कटनी की गौरवशाली परम्परा को कायम रखने के लिए आयोजकों को धन्यवाद दिया।

IMG 20240820 WA0035

कटनी के प्रसिद्ध समीर श्री राम मंदिर गाटर घाट प्रांगण में कजलियां पर कार्यक्रम किया जा रहा है। बारडोली उत्सव समिति के अध्यक्ष राजू रजक एवं सचिव मनोज निगम ने जानकारी में बताया कि समिति का प्रयास सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, धरोहरों को सहेजने का है की पूर्व की भांति इस वर्ष भी मेले में मिकी माउस, झूला, कठपुतली नृत्य, सांस्कृतिक, सामाजिक, मनोरंजन कार्यक्रम जिसमें जूनियर सलमान खान एवं आर्केस्ट्रा का भी आयोजन किया गया जो खबर लिखने तक जारी था।

IMG 20240820 WA0032

बुंदेलखंड की लोक परंपरा अनुसार रक्षाबंधन के अगले दिन भादौ महीने की परीवा को मनाए जाने वाले लोकपर्व कजलियां की मंगलवार को धूम रही। लोगों ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान के चरणों मे कजलियां समर्पित कर सुख-समृद्धि तथा सौहार्द्र की प्रार्थना की और फिर एक दूसरे को कजलियां भेंट कर शुभकामनाएं दीं। परंपरा अनुसार छोटों ने बड़ों को कजलियां भेंट कर आशीर्वाद लिया जबकि बड़ों ने छोटों के कान में कजलियां लगा कर अपना स्नेह जताया। शगुन के तौर पर घर की लड़कियों और बच्चों को रुपए भी दिए गए। कजलियों का नदी के घाटों में विसर्जन किया जाता है। इसी में कुछ कजलियों को एक दूसरे को भेंट करने की परंपरा है।

IMG 20240820 WA0033

क्या हैं कजलियां?
कजलियां गेहूं के छोटे पौधे होते हैं। नाग पंचमी के दूसरे दिन खेत से लाई गई मिट्टी को किसी मिट्टी के ही बर्तन में भर दिया जाता है और उसमे गेहूं के बीज डाल दिए जाते हैं। इसे रक्षा बंधन तक खाद पानी दिया जाता है और फिर अगले दिन उस बर्तन में उग आए छोटे पौधों यानी कजलियों को भगवान को समर्पित कर एक दूसरे को भेंट किया जाता है। इसे सुख-समृद्धि और नई फसल की सम्भावनाओं का प्रतीक भी माना जाता है। लोग इन्हें एक दूसरे को भेंट कर शुभकामनाएं देते हैं।

Back to top button