Jabalpur Corona Update : टूटे सभी रिकार्ड- 24 घंटे, 402 कोरोना संक्रमित, 4 की मौत और अब …
जबलपुर। जबलपुर में कोरोना महामारी विस्फोटक दौर में पहुंच गई है। शनिवार को बायरोलॉजी लैब से जारी दो हजार 534 सैंपल की रिपोर्ट में कोरोना से संक्रमित 402 नए मरीज सामने आए जो 386 दिन पुरानी महामारी में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस दौरान कोरोना महामारी ने चार और मरीजों की जान ले ली, जिसके बाद मृतक संख्या बढ़कर 284 हो गई। इधर, 24 घंटे के भीतर कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए 179 लोगों को होम व संस्थागत आइसोलेशन से छुट्टी दी गई। इस प्रकार जिले में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 21 हजार 946 हो गई है जिसमें 19 हजार 226 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। शनिवार को दो हजार 541 संदिग्धों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। कोरोना के ज्यादा मरीज मिलने के कारण रिकवरी दर घटकर 87.60 फीसद हो गई तथा सक्रिय मरीजों की संख्या बढ़कर दो हजार 436 हो गई है। इधर, पुलिस विभाग में भी कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। नागरिकों को महामारी से बचाने के लिए पुलिस जवान दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं और लापरवाहों को पकड़ने के चक्कर में अनजाने में संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण शिवेश सिंह बघेल, थाना प्रभारी ओमती एसपीएस बघेल समेत 27 जवान कोरोना की चपेट में आ चुके हैं।
फैक्ट फाइल-
कुल संक्रमित-21946
स्वस्थ हुए-19226
सक्रिय मरीज-2436
मृत्यु-284
एक अस्पताल ने भर्ती नहीं किया, दूसरे अस्पताल पहुंचने से पहले थम गई सांसें : सीजीएचएस लाभार्थियों के साथ निजी अस्पतालों में अमानवीय रवैया अपनाया जा रहा है। योजना के अंतर्गत एक वृद्ध लाभार्थी को भर्ती कराने के लिए स्वजन निजी अस्पताल पहुंचे जहां लापरवाह व्यवस्था के चलते उनकी नब्ज टटोलने से भी इन्कार कर दिया गया। परेशान स्वजन मिन्नत करते रहे, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। स्वजन वृद्ध को लेकर दूसरे निजी अस्पताल पहुंचे तब तक सांसें थम चुकी थीं। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन ने कलेक्टर से निजी अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
एसोसिएशन अध्यक्ष सुभाष चंद्रा ने बताया कि वृद्ध टेकलाल विश्वकर्मा सीजीएचएस हितग्राही थे। शनिवार सुबह उनकी तबीयत खराब हुई जिसके बाद पुत्र सोनू विश्वकर्मा मेडिकल इमरजेंसी में उन्हें लेकर नागरथ चौक स्थित सिटी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल कर्मचारियों को जैसे ही पता चला कि वृद्ध सीजीएचएस लाभार्थी हैं उनका इलाज करना तो दूर नब्ज टटोलने से भी इन्कार कर दिया गया। काफी देर चली जद्दोजहद के बाद जब सिटी अस्पताल में टेकलाल के उपचार की मनाही होती रही तो पुत्र सोनू उन्हें लेकर जबलपुर अस्पताल पहुंचे। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सिटी अस्पताल में समय रहते उपचार मिल जाता तो संभवत: टेकलाल की जान बचाई जा सकती थी। कलेक्टर को लिखे पत्र में चंद्रा ने कहा कि जिले में लगभग 90 हजार सीजीएचएस लाभार्थी हैं। निजी अस्पताल के इस रवैये के कारण उनका जीवन संकट में नजर आ रहा है।

