ईरान: सोशल मीडिया पोस्ट पर ईशनिंदा का आरोप, 23 वर्षीय छात्रा नजमेह अमिनी को मौत की सजा

ईरान: सोशल मीडिया पोस्ट पर ईशनिंदा का आरोप, 23 वर्षीय छात्रा नजमेह अमिनी को मौत की सजा

ईरान: सोशल मीडिया पोस्ट पर ईशनिंदा का आरोप, 23 वर्षीय छात्रा नजमेह अमिनी को मौत की सजा

तेहरान/मशहद: ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद की रहने वाली 23 वर्षीय छात्रा नजमेह अमिनी को सोशल मीडिया पोस्ट पर कथित ईशनिंदा (धार्मिक अपमान) के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। इस फैसले के बाद वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों से जुड़े विवाद के केंद्र में आ गई हैं। इस मामले ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक कानूनों और ईरान में सजा-ए-मौत के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या हैं आरोप और क्या कहता है कानून?

  • ‘सब्ब अल-नबी’ का आरोप: अमिनी पर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने का आरोप है, जिसे इस्लामिक कानून में ‘सब्ब अल-नबी’ कहा जाता है।

  • धारा 262 के तहत सजा: ईरान की इस्लामिक दंड संहिता की धारा 262 के तहत पैगंबर का अपमान करने पर मृत्युदंड का प्रावधान है।

  • बचाव पक्ष की दलील खारिज: अमिनी के बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह बयान गलती से और साइकेडेलिक (नशीले) मशरूम के प्रभाव में मतिभ्रम (hallucinations) के कारण निकला था। कानून की धारा 263 में अनजाने या नशे की हालत में कही गई बातों पर छूट का प्रावधान है, लेकिन मशहद की अदालत के जज ने इस दलील को खारिज कर दिया।

दो अलग-अलग मुकदमों में सजाएं

अमिनी पर दो अलग-अलग मामलों में अदालती कार्रवाई की गई है:

  1. ईशनिंदा मामला (आपराधिक अदालत): सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर मौत की सजा सुनाई गई।

  2. राष्ट्रीय सुरक्षा मामला (क्रांतिकारी अदालत): सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 12 साल, 6 महीने और 1 दिन की जेल की सजा सुनाई गई।ईरान: सोशल मीडिया पोस्ट पर ईशनिंदा का आरोप, 23 वर्षीय छात्रा नजमेह अमिनी को मौत की सजा

प्रदर्शनों के दौरान हुई थीं गिरफ्तार

अमिनी को जनवरी 2026 में देशव्यापी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में उन्हें मशहद की वकीलाबाद जेल में रखा गया है। जेल से सामने आए एक कथित ऑडियो संदेश में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। हालांकि, उनकी मौत की सजा अभी अंतिम नहीं है और इसके खिलाफ ईरान के सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।

मानवाधिकार संगठनों ने उठाए निष्पक्षता पर सवाल

‘ईरान ह्यूमन राइट्स’ (IHR) और ‘HRANA’ सहित विभिन्न मानवाधिकार समूहों ने कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं:

  • अमिनी को अपनी पसंद का वकील चुनने की अनुमति नहीं दी गई।

  • हिरासत के दौरान जबरन कबूलनामा लेने के लिए शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का संदेह जताया गया है।

  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति का मानना है कि गैर-हिंसक अपराधों (जिन्हें ‘सबसे गंभीर अपराध’ नहीं माना जाता) के लिए मौत की सजा देना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।