सेबी के नए क्लोजिंग ऑक्शन नियमों से बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी उछले; ग्रो और एंजेल वन के शेयरों में चमक
मुंबई: वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बीच 16 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में हल्की सुस्ती के बाद बाजार में चौतरफा खरीदारी लौटी। सेंसेक्स 443.22 अंक (0.59%) की तेजी के साथ 74,758.83 और निफ्टी 148 अंक (0.64%) उछलकर 23,145.35 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार की इस तेजी में ग्रो (Groww), एंजेल वन, बीएसई (BSE) और एनएसई (NSE) जैसी कैपिटल मार्केट कंपनियों के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया।
शेयर बाजार में तेजी का मुख्य कारण: SEBI के नए नियम
ब्रोकिंग और एक्सचेंज शेयरों में आई इस तेजी का मुख्य कारण पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) द्वारा ‘क्लोजिंग ऑक्शन सेशन’ (CAS) के ढांचे में किए गए सुधार हैं।
ग्लोबल ब्रोकरेज जेफरीज की राय: जेफरीज के अनुसार, नए ढांचे से एक्सपायरी के दिन बाजार में होने वाली अत्यधिक उतार-चढ़ाव (volatility) कम होगी। इससे उन ब्रोकर्स को लाभ मिलेगा जिनके ऑर्डर पुराने स्तर से नीचे अटके थे।
इन्वेस्टमेंट रेटिंग: जेफरीज ने इस घटनाक्रम के बाद ग्रो (Groww) के शेयर में खरीदारी की सिफारिश की है।
दोपहर 3:30 बजे के बाद 3 चरणों में चलेगा क्लोजिंग ऑक्शन
सेबी के नए नियमों के अनुसार सभी ट्रेडिंग दिनों में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन दोपहर 3:30 से 3:40 बजे तक 10 मिनट के लिए चलेगा। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से 7 दिसंबर 2026 से प्रभावी होगी:
पहला चरण (3:30 – 3:31 PM): रेफरेंस प्राइस तय किया जाएगा और रेगुलर ट्रेडिंग सेशन के पेंडिंग ऑर्डर ट्रांसफर किए जाएंगे।
दूसरा चरण (3:31 – 3:36 PM): इन्वेस्टर्स लिमिट (Limit) और मार्केट (Market) दोनों तरह के ऑर्डर प्लेस कर सकेंगे।
तीसरा चरण (3:36 – 3:40 PM): केवल लिमिट ऑर्डर स्वीकार किए जाएंगे। मार्केट ऑर्डर में बदलाव या उन्हें कैंसिल करने की अनुमति नहीं होगी। यह विंडो 3:38 से 3:40 बजे के बीच किसी भी रैंडम समय पर बंद हो जाएगी।
डेरिवेटिव्स और सेटलमेंट के नए नियम
इंडेक्स एक्सपायरी: सामान्य दिनों में इंडेक्स डेरिवेटिव 3:45 PM तक चलेंगे, लेकिन एक्सपायरी वाले दिन दोपहर 3:30 बजे ही ट्रेडिंग बंद हो जाएगी।
स्टॉक डेरिवेटिव: एक्सपायरी के दिन भी शाम 3:45 बजे तक खुले रहेंगे।
पोस्ट-क्लोज सेशन: कैश मार्केट में 3:50 PM से 4:00 PM के बीच होगा, जहां तय क्लोजिंग प्राइस पर सौदे निपटाए जाएंगे।
सेटलमेंट मूल्य (VWAP): एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स का सेटलमेंट प्राइस अब आखिरी 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के आधार पर तय होगा।
पेंडिंग ऑर्डर्स के ट्रांसफर पर नियम
रेगुलर सेशन से क्लोजिंग ऑक्शन में स्टॉप-लॉस और प्राइस बैंड से बाहर वाले ऑर्डर्स को छोड़कर बाकी अधूरे लिमिट ऑर्डर्स स्वतः ट्रांसफर हो जाएंगे। पेंडिंग आइसबर्ग ऑर्डर (Iceberg Orders) पूरी तरह डिस्क्लोज्ड लिमिट ऑर्डर में बदल जाएंगे।













