रसोई पर महंगाई की मार: कटनी की मंडियों में टमाटर-प्याज हुए महंगे; जानिए क्यों आसमान छू रहे हैं सब्जियों के दाम
कटनी में भी कड़े हुए सब्जियों के तेवर: टमाटर-प्याज की कीमतों में उछाल, रसोई का बिगड़ा बजट
रसोई पर महंगाई की मार: कटनी की मंडियों में टमाटर-प्याज हुए महंगे; जानिए क्यों आसमान छू रहे हैं सब्जियों के दाम
कटनी: देश की राजधानी दिल्ली और बड़े महानगरों की तरह अब कटनी जिले में भी आम उपभोक्ताओं की जेब पर महंगाई का बोझ बढ़ने लगा है। भीषण गर्मी, अल-नीनो के असर और मानसून की शुरुआती उठापटक के चलते स्थानीय सब्जी मंडियों में टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में तेजी का दौर शुरू हो गया है, जिससे गृहिणियों के किचन का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है।
कटनी की मंडियों और रिटेल बाजार का हाल
राष्ट्रीय स्तर पर जून के महीने में टमाटर के औसत दाम जहाँ 18 फीसदी और प्याज में 11 फीसदी तक का इजाफा हुआ है, वहीं कटनी के स्थानीय रिटेल बाजारों में भी इसका सीधा असर देखा जा रहा है:
टमाटर के दाम चढ़े: भीषण गर्मी के कारण खेतों में फसल झुलसने और बाहर से आने वाले टमाटरों के रास्ते में ही खराब होने (जल्दी पकने) की वजह से आवक घटी है। स्थानीय रिटेल बाजार में टमाटर ₹25 से ₹35 प्रति किलो के आसपास पहुंच रहे हैं, जो आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं।
प्याज और आलू भी हुए कड़े: थोक मंडी में प्याज के भाव मजबूत होने के बाद स्थानीय फुटकर बाजारों में प्याज ₹30 से ₹35 प्रति किलो तक बिक रही है। वहीं, आलू भी ₹25 से ₹30 प्रति किलो के स्तर पर बना हुआ है।
क्यों आ रही है कीमतों में तेजी? (कटनी के व्यापारियों का पक्ष)
स्थानीय आजाद चौक और अन्य सब्जी मंडियों के व्यापारियों के मुताबिक, सब्जियों की बढ़ती कीमतों के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं:
लोकल आवक में भारी कमी: कटनी और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाली स्थानीय सब्जियों की सप्लाई भीषण गर्मी की वजह से लगभग ठप हो गई है।
ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और रिस्क: अन्य राज्यों या बड़े शहरों (जैसे राजस्थान और हरियाणा) से आने वाले टमाटर रास्ते में अत्यधिक तापमान के कारण खराब हो रहे हैं। नुकसान की भरपाई के लिए थोक रेट बढ़ गए हैं।
बेमौसम बारिश से स्टोरेज प्रभावित: पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश की वजह से प्याज के स्टोरेज (भंडारण) की क्वालिटी पर असर पड़ा है, जिससे मंडियों में अच्छा प्याज कम आ रहा है।
‘फूड इन्फ्लेशन’ की चिंता: क्या कहते हैं जानकार?
कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में टमाटर, प्याज और आलू की हिस्सेदारी 1.75% होती है। जानकारों का कहना है कि यदि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने तक यही स्थिति रही, तो जुलाई महीने में खाद्य महंगाई (Food Inflation) का ग्राफ और ऊपर जा सकता है। कटनी के स्थानीय निवासियों को राहत तभी मिलेगी जब नई फसल की आवक सुधरेगी।रसोई पर महंगाई की मार: कटनी की मंडियों में टमाटर-प्याज हुए महंगे; जानिए क्यों आसमान छू रहे हैं सब्जियों के दाम