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वेश्यालय में सेक्स वर्कर्स की सेवाएं लेने वाले व्यक्ति ग्राहक नहीं, केरल हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

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केरल उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि वेश्यालयों में सेक्स वर्कर्स की सेवाएं लेने वाले व्यक्ति केवल ग्राहक नहीं होते, बल्कि वे वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देते हैं और शोषण में भागीदार होते हैं. कोर्ट ने सेक्स वर्कर्स को ‘उत्पाद’ कहने को भी अपमानजनक बताया है।

वेश्यालय में सेक्स वर्कर्स की सेवाएं लेने वाले व्यक्ति ग्राहक नहीं, केरल हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

वेश्यालयों में जाने वाले लोगों के खिलाफ केरल हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने कहा कि वेश्यालय में सेक्स वर्कर की सेवाएं लेने वालों को ग्राहक नहीं कहा जा सकता है. साथ ही साफ किया कि सेक्स वर्कर को उत्पाद कहकर अपमानित नहीं किया जा सकता है. हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे कृत्यों के लिए पैसे देकर यह लोग वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देते हैं।

 

अदालत ने यह टिप्पणियां अनैतिक तस्करी (रोकथाम) कानून 1956 से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की. केरल हाई कोर्ट के जस्टिस वीजी अरुण ने कहा कि सेक्स वर्कर्स को वस्तु की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. उनके साथ यौन क्रियाओं में शामिल लोग महज ‘ग्राहक’ नहीं होते हैं, बल्कि वो उनके शोषण में भी भागीदार होते हैं।

वेश्यालयों में सेवाएं लेने वाला व्यक्ति ग्राहक नहीं- HC

केरल हाई कोर्ट के अनुसार वेश्यालयों में सेवाएं लेने वाला व्यक्ति ग्राहक नहीं होता है. उनके द्वारा दिए गए पैसे सेक्स वर्कर्स को खुद की मर्जी के खिलाफ जाकर काम करने के लिए मजबूर करते हैं. इससे मानव तस्करी जैसे अपराधों को भी बढ़ावा मिलता है.

हाई कोर्ट ने अनैतिक तस्करी के आरोप में एक महिला के साथ गिरफ्तार किए गए एक शख्स के खिलाफ कार्यवाही के मामले में आशिंक रूप से राहत देते हुए कहा कि एक यौनकर्मी को उत्पाद कहकर अपमानित नहीं किया जा सकता है. जबकि ग्राहक होने के लिए किसी व्यक्ति को कुछ सामान या सेवाएं खरीदनी चाहिए. जबकि सेक्स वर्कर को मानव तस्करी के जरिए इस धंधे में फंसाया जाता है और दूसरों को शारीरिक सुख की पूर्ति के लिए अपना शरीर मुहैया कराने के लिए मजबूर किया जाता है.

‘पैसे देकर वेश्यावृत्ति की ओर धकेल रहा होता है’

हकीकत ये है कि सुख चाहने वाला व्यक्ति पैसे दे रहा होता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा वेश्यालय के संचालक को जाता है. हाई कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे में इस भुगतान को केवल सेक्स वर्कर को अपना शरीर मुहैया कराने और भुगतानकर्ता की मांगों के अनुसार काम करने लिए प्रेरित या मजबूर करने के रूप में ही देखा जा सकता है. इस तरह से वेश्यालय में सेक्स वर्कर की सेवाएं लेने वाला व्यक्ति वास्तव में उसे पैसे देकर वेश्यावृत्ति की ओर धकेल रहा होता है. केरल हाई कोर्ट का यह आदेश 2021 के एक मामले के संदर्भ में आया है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल 2021 में पुलिस ने तिरुवनंतपुरम के पेरोरकाडा में छापेमारी की थी, जहां उन्होंने याचिकाकर्ता समेत 2 लोगों को वेश्यालय चलाते हुए पकड़ा था. याचिकाकर्ता को 2021 में तिरुवनंतपुरम् नगर पुलिस ने अनैतिक व्यापार निवारण कानून की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था. अदालत ने अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत कार्यवाही रद्द कर दी.

अदालत ने और क्या कहा?

ये धाराएं वेश्यालय चलाने या किसी परिसर को वेश्यालय के रूम में इस्तेमाल करने और वेश्यावृत्ति से होने वाली कमाई पर जीवन यापन करने की सजा से जुड़ा है. हालांकि अदालत ने कहा कि उसे अधिनियम की धारा 5(1)(डी) (किसी व्यक्ति को वेश्यावृत्ति के लिए प्रेरित करना) और धारा 7 (सार्वजनिक स्थान पर या उसके आसपास वेश्यावृत्ति के तहत अपराधों के लिए अभियोजन का सामना करना होगा। वेश्यालय में सेक्स वर्कर्स की सेवाएं लेने वाले व्यक्ति ग्राहक नहीं, केरल हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

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