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Indian Army: भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने में अमेरिकी असॉल्ट राइफलें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी

Indian Army: भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने में अमेरिकी असॉल्ट राइफलें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। अमेरिका की शस्त्र कंपनी सिग सायर भारत में भी हथियारों का निर्माण करेगी। इसके लिए उसने पुणे स्थित निबे समूह के साथ समझौता किया है।

Indian Army: भारतीय सेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने में अमेरिकी असॉल्ट राइफलें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी

इससे पहले अमेरिकी कंपनी सिग सायर भारतीय सेना के साथ 1.45 लाख असॉल्ट राइफलों का अनुबंध कर चुकी है। इसमें 72500 सिग 716 असॉल्ट राइफलों की आपूर्ति की जा चुकी है। कंपनी 2025 तक सेना को 73 हजार और राइफलें दे देगी। वहीं बुधवार को सीडीएस अनिल चौहान ने पुणे में निबे इंडस्ट्रीज का दौरा किया और रक्षा क्षेत्र में लघु-मध्यम उद्यमों की क्षमताओं की समीक्षा की।

 

निबे समूह के साथ साझेदारी की घोषणा करते हुए अमेरिकी कंपनी के सीईओ और अध्यक्ष रॉन कोहेन ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर उसका सबसे बड़ा खरीद स्रोत है। उन्होंने कहा कि 2025 तक कंपनी भारत में एक पूर्ण उत्पाद का निर्माण करने की योजना बना रही है। इसमें रक्षा मंत्रालय (एमओडी) और गृह मंत्रालय (एमएचए) भी शामिल हैं।

अग्निपथ योजना की बताई खासियत
पुणे में बुधवार को चीफ डिफेंस ऑफ स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने अग्निपथ योजना की खासियत बताई। उन्होंने कहा कि यह योजना को युवाओं के लिए सशस्त्र बलों में शामिल होने और सेवा करने का बेहतरीन अवसर है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों में महत्वपूर्ण सुधार और परिवर्तन हो रहे हैं। इन सुधारों के तहत हम एकजुटता और एकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अब हम सेनाओं को अलग-अलग नहीं देखते हैं। अब थलसेना, वायुसेना और नौसेना को एक एकीकृत यूनिट के रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य एक साथ अपनी ताकत को प्रदर्शित करना है।

उन्होंने कहा कि सेना में अन्य प्रमुख सुधार अग्निपथ योजना है, जो युवाओं को रक्षा बलों में शामिल होने और काम करने का मूल्यवान अवसर प्रदान देती है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों की सफलता शिक्षा जगत, रक्षा उद्योग और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय पर निर्भर करती है। पिछले 4-5 वर्षों में हमने इन तीन तत्वों के बीच बढ़ते सहयोग, समन्वय, तालमेल और एकीकरण को देखा है, जो रक्षा उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं। यह एकीकरण आवश्यकता है जिसे बहुत पहले किया जाना चाहिए था।

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