Tuesday, May 19, 2026
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भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा — ट्रम्प की धमकी के बावजूद, बंद किया तो होगा $9–11 बिलियन का नुकसान

भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा — ट्रम्प की धमकी के बावजूद, बंद किया तो होगा $9–11 बिलियन का नुकसान। डोनाल्ड ट्रंप भारत पर लगातार रूस से तेल न खरीदने का प्रेशर बना रहे हैं. सोमवार, 4 अगस्त की रात को उन्होंने रूस से तेल खरीदने पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की भी धमकी दे डाली।

 

भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा — ट्रम्प की धमकी के बावजूद, बंद किया तो होगा $9–11 बिलियन का नुकसान

अमेरिका के इतने विरोध करने के बाद भी इंडिया रसियन ऑयल का इंपोर्ट नहीं रोक रहा है. इसके पीछे का प्रमुख कारण इकोनॉमी से जुड़ा है. अगर वह रूसी तेल खरीदने में कमी लाता है, तो उसे ग्रास रिफाइनरी मार्जिन में 1 से लेकर 1.5 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आ सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते भारत से आने वाले सामान पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जो 7 अगस्त 2025 से लागू होगा.अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने भी चीन को चेतावनी दी है किअगर उसने रूस से तेल खरीदना जारी रखा तो भारी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा. भारत को भी रूसी तेल खरीदना बंद करने की धमकी दी गई है.

भारत और रूस का तेल इंपोर्ट

भारत रूसी तेल के बड़े खरीदारों में से एक है. साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने और रूसी तेल की कीमतें गिरने के बाद भारत के इंपोर्ट में भारी बढ़ोतरी हुई. FY2018-FY2022 में भारत के कुल क्रूड आयात में रूसी तेल का हिस्सा सिर्फ 1.5% था, जो वित्त वर्ष 2023 में 19.3% और वित्त वर्ष 2024- वित्त वर्ष 2025 में 33-35% हो गया. जेएम फाइनेंशियल के विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की रूस पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है ताकि रूस यूक्रेन के साथ शांति समझौता करे. अगर भारत रूसी तेल आयात बंद करता है तो क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिससे ट्रंप का अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें कम करने का दबाव कमजोर पड़ सकता है. लेकिन जिस हिसाब से ट्रंप अभी धमकी दे रहे हैं. वैसे में नहीं लगता है कि यह मसला आसानी से सुलझ जाएगा.

तेल कंपनियों पर असर

जेएम फाइनेंशियल के मुताबिक, अगर भारत रूसी तेल आयात बंद करता है, तो इसका ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और CPCL/MRPL पर बड़ा असर पड़ेगा, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज पर भी हल्का नकारात्मक प्रभाव होगा. रूसी तेल की 3-4 डॉलर प्रति बैरल की छूट की वजह से FY23 से रिफाइनरों को 1-1.5 डॉलर प्रति बैरल का GRM फायदा हुआ, जो भारत की 30-40% क्रूड जरूरतों को पूरा करता है. इस मार्जिन पर रोक का असर पड़ सकता है. 1 डॉलर प्रति बैरल GRM की कमी से FY26 में OMCs का EBITDA 8-10%, MRPL/CPCL का 20-25%, और रिलायंस का कुल EBITDA करीब 2% प्रभावित हो सकता है.

क्रूड की कीमतें बढ़ सकती हैं

अगर भारत रूसी तेल आयात बंद करता है और चीन या अन्य देश इसकी भरपाई नहीं करते, तो क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. चीन पहले से ही 2-2.5 मिलियन बैरल प्रति दिन रूसी तेल खरीदता है, जबकि उसकी कुल मांग 16.5 मिलियन बैरल प्रति दिन है.

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि