कटनी। माधवनगर थाना अंतर्गत लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व बैग कारोबारी पर चाकू से हुए जानलेवा हमले की पुर्नविवेचना में नया मोड़ आ गया है। न्यायालय के आदेश पर पुलिस के द्धारा की गई पुर्नविवेचना में एक आरोपी अजय निषाद को जबरन फंसाए जाने की बात सामने आई है। जिसके बाद पुलिस ने मामले में एक आरोपी अजय निषाद का नाम अलग करके प्रकरण पुन: न्यायालय में प्रस्तुत किया है। पुलिस की पुर्नविवेचना पर नजर डालें तो यह मामला व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता का प्रतीत होता है। करीब डेढ़ साल पुराने इस चर्चित मामले में पुलिस ने बैग व्यापारी संजय पोहानी पर चाकू से कतिथ हमले के आरोप में अन्य आरोपियों के साथ दो सगे भाई आनंद निषाद व अजय निषाद को आरोपी बनाया था। संजय पोहानी ने पुलिस में शिकायत की थी कि इन्हीं दोनों भाइयों ने उस पर जानलेवा हमला कराया है। पुर्नविवेचना के दौरान यह बात सामने आई कि संजय पोहानी घटना के पहले अजय निषाद के साथ मिलकर बैग का व्यवसाय करता था। कुछ समय तक सब ठीक ठाक था पर कुछ कारणों से इन लोगों की साझेदारी नहीं चल सकी। अजय व आनंद ने आरोप लगाया कि संजय पोहानी ने हिसाब में लाखों का हेरफेर किया। दुकान की कमाई को क्रिकेट सट्टे तथा अन्य अनाधिकृत कार्यों बर्बाद किया। यही बर्बादी जब सामने आई तो लाखों की देनदारी से बचने उसने व्यवसाय अलग कर लिया तथा जब हिसाब किताब की बात आई तो लड़ाई झगड़ा करने पर उतारू हो जाता था। इसी दौरान संजय पोहानी पर किसी ने हमला किया तो यह आरोप भी उसने दोनो भाइयों अजय और आनंद पर लगा दिया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। संजय पोहनी ने इस हमले का आरोपी अजय निषाद व आनंद निषाद को बताया। इसी बीच अजय निषाद ने न्यायालय से पुर्नविवेचना कराए जाने का आग्रह अपने वकील के माध्यम से किया। अजय निषाद के आग्रह पर न्यायालय ने पुलिस को सूक्ष्म जांच के आदेश दिए। पुलिस ने पूरे मामले की तह तक पहुंचकर साक्ष्य का बारिकी से अध्ययन किया तो यह पता लगा कि इस मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए अजय निषाद की संलिप्तता नहीं थी बल्कि वो तो घटना से कई दिनों पहले से ही शहर में ही मौजूद नहीं था। जिसके बाद मामले में दोनों आरोपियों अजय निषाद व आनंद निषाद को जमानत का लाभ मिला और पुलिस की जांच में परत दर परत सच्चाई उजागर हुई। बहरहाल पुलिस ने न्यायालय में गत दिवस चालान प्रस्तुत किया। जिसमें अजय निषाद को घटना में संलिप्त न पाते हुए क्लीन चिट दी है। उधर अजय निषाद ने आरोप लगाया कि दोनों भाइयों को बेवजह न सिर्फ संजय पोहनी ने फंसाया बल्कि कई अन्य माध्यम से उन्हें डराता धमकाता भी है। पुलिस की पुर्नविवेचना में यह बात निकल कर सामने आई कि उधारी का पैसा न देना पड़े लिहाजा फरियादी का नाम लेकर एफआईआर कराई गई। 7 साल तक चली साझेदारी के बाद यह व्यवसायी प्रतिद्वंदिता मारपीट के गंभीर मामले तक जा पहुंची। पुलिस ने अपने चालान में बिंदुवार पूरे घटनाक्रम से न्यायालय को अवगत कराया है।
समाज को भी किया गुमराह
अजय निषाद, आनंद निषाद ने कहा कि उन्हें जबरन फंसाने के लिए संजय पोहानी ने समाज विशेष को भी गुमराह किया। अजय निषाद ने बताया कि उनका परिवार माधवनगर के हरे माधव गुरु दरबार से वर्षों जुड़ा हुआ था। इस मामले के बाद संजय पोहानी ने दरबार मे आने पर और बुरी तरह से फंसाने की धमकी दी कि बाबा जी से आशीर्वाद लेने और सेवा में आओगे तो अंजाम बुरा होगा। इसके अलावा भी हर स्तर पर दोनों भाइयों को परेशान करता रहा। बड़े व्यापारियों को प्रायोजित खबरों को भेज कर बदनाम करने की कोशिश भी की गई। अलबत्ता पुलिस ने जांच में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।
एसपी से कार्रवाई की मांग
उधर मामले से क्लीनचिट मिलने के बाद आज अजय निषाद ने पुलिस अधीक्षक अभिजीत रंजन को एक शिकायत देकर बैग कारोबारी संजय पोहानी पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में अजय निषाद ने कहा है कि उनकी सामाजिक छवि खराब करने तथा दोनो भाइयों जिनका कभी कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं था किंतु इनका जीवन बर्बाद करने की नीयत से संजय पोहानी के द्वारा झूठा आरोप मढ़ा गया। अभी भी संजय पोहानी न सिर्फ सामाजिक, व्यवसायिक छवि खराब करने का षड्यंत्र रच रहा बल्कि जानलेवा हमला भी करने का कृत्य कर सकता है। अजय और आनंद ने स्वयं की जान का खतरा भी बताया है। न्यायालय के आदेश पर पुलिस की जांच में हत्या के प्रयास के आरोपी अजय निषाद की संलिप्तता नहीं पाई गई। लंबे समय तक चले इस मामले में पुलिस की जांच अहम थी, जिससे एक बेगुनाह को अपराधी बनाने के दलदल में डालने से बचाया गया। अजय के अनुसार सबसे निराशाजनक बात थी जब उनके गुरु के दरबार मे आने से पोहानी ने रोका और वहां ना आने की धमकी दी जबकि उनका परिवार 14 सालों से हरे माधव दरबार से जुड़ा है। साफ है कि पोहानी ने निषाद परिवार की आस्था पर भी चोट पहुंचाई। अजय निषाद ने पुलिस अधीक्षक श्री रंजन से संजय पोहानी के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की है।
