दतिया भाजपा को नया जिलाध्यक्ष मिला, माधवराव सिंह परिहार को मिली जिम्मेदारी, उपचुनाव में हार के बाद संगठन में बड़ा बदलाव

दतिया भाजपा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने माधवराव सिंह परिहार को सौंपी जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी; उपचुनाव में हार और टिकट विवाद के बाद पार्टी ने बदली संगठन की कमान

दतिया। मध्यप्रदेश भाजपा ने दतिया जिले के नए जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने माधवराव सिंह परिहार को दतिया भाजपा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार और उसके बाद जिला संगठन में किए गए बदलावों के बीच नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को संगठन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दतिया में नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब पिछले कुछ महीनों में भाजपा को जिले में कई राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। विधानसभा उपचुनाव से पहले टिकट को लेकर सामने आए विवाद, पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की नाराजगी और चुनाव परिणाम के बाद जिला संगठन को भंग किए जाने के बाद अब भाजपा ने नए नेतृत्व के साथ संगठन को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है।

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उपचुनाव में भाजपा को मिली थी हार

 

दतिया विधानसभा सीट पर जुलाई 2026 में हुए उपचुनाव में भाजपा को कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट प्राप्त हुए। इस तरह घनश्याम सिंह ने 6,016 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

उपचुनाव के नतीजे भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहे, क्योंकि दतिया लंबे समय से पार्टी की मजबूत राजनीतिक जमीन के तौर पर देखा जाता रहा है। चुनाव परिणाम के बाद भाजपा ने दतिया जिला संगठन को भंग कर दिया था और तत्कालीन जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह समेत जिला कार्यकारिणी को हटा दिया गया था। इसके बाद नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पार्टी के भीतर मंथन शुरू हुआ।

 

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना बना था बड़ा मुद्दा

 

दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले भाजपा की ओर से प्रत्याशी चयन को लेकर भी काफी राजनीतिक हलचल देखने को मिली थी। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री और दतिया के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को टिकट देने के बजाय आशुतोष तिवारी को भाजपा प्रत्याशी बनाया था। इस फैसले के बाद दतिया में पार्टी कार्यकर्ताओं और नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की ओर से विरोध देखने को मिला था।

 

टिकट की घोषणा के बाद विरोध इतना बढ़ा कि दतिया में प्रदर्शन और सड़क जाम जैसी घटनाएं सामने आईं। इसी दौरान तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने जिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ सामूहिक इस्तीफे की घोषणा की थी।

 

हालांकि बाद में नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के नामांकन के दौरान उनके साथ मंच साझा किया और चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के समर्थन की बात भी सामने आई।

 

आशुतोष तिवारी को मिली थी भाजपा की ओर से टिकट

 

भाजपा ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को अपना प्रत्याशी बनाया था। प्रत्याशी चयन के बाद पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन के भीतर बनी नाराजगी को संभालने और चुनाव मैदान में एकजुट होकर उतरने की थी।

 

लेकिन चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में नहीं आया। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से हराया।

 

हार के बाद भंग हुआ था दतिया भाजपा संगठन

 

उपचुनाव में हार के बाद भाजपा ने दतिया जिला संगठन को भंग कर दिया था। इसके साथ ही जिला अध्यक्ष और जिला कार्यकारिणी के अलावा संगठन के विभिन्न प्रकोष्ठों और इकाइयों को भी समाप्त किया गया था। पार्टी ने चुनाव परिणाम की समीक्षा के लिए जांच समिति भी गठित की थी।

 

इसके बाद नए जिलाध्यक्ष को लेकर कई नामों की चर्चा सामने आई थी। अगस्त में सामने आई मीडिया रिपोर्टों में आशुतोष तिवारी, रामनरेश यादव, कालीचरण कुशवाहा, माधवेन्द्र परिहार, अनूप यादव और दिनेश शर्मा जैसे नामों की चर्चा का उल्लेख किया गया था।

 

अब पार्टी ने माधवराव सिंह परिहार के नाम पर मुहर लगाते हुए दतिया संगठन की कमान उनके हाथों में सौंप दी है।

 

नए जिलाध्यक्ष के सामने संगठन को मजबूत करने की चुनौती

 

माधवराव सिंह परिहार के सामने दतिया भाजपा संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने की चुनौती होगी। उपचुनाव के दौरान सामने आए संगठनात्मक मतभेदों और चुनाव के बाद हुए बदलाव के बीच नए जिलाध्यक्ष को पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाते हुए संगठनात्मक गतिविधियों को गति देनी होगी।

 

दतिया के साथ-साथ सेवढ़ा और भांडेर क्षेत्र में भी भाजपा संगठन को सक्रिय रखने की जिम्मेदारी नए नेतृत्व के सामने होगी। उपचुनाव के बाद संगठन में हुए बदलाव के कारण पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करना महत्वपूर्ण रहेगा।

 

2028 के विधानसभा चुनाव से पहले अहम नियुक्ति

 

दतिया भाजपा में नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को आगामी राजनीतिक तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपचुनाव के बाद पार्टी के सामने संगठन को मजबूत करने और भविष्य के चुनावों के लिए जमीनी स्तर पर तैयारी करने की चुनौती है।

 

माधवराव सिंह परिहार के सामने अब बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने और पार्टी की गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी होगी। आने वाले समय में दतिया भाजपा की संगठनात्मक दिशा और स्थानीय राजनीति में नए जिलाध्यक्ष की भूमिका पर नजर रहेगी।

 

इस तरह दतिया भाजपा में उपचुनाव के बाद शुरू हुए संगठनात्मक बदलाव के क्रम में अब नए जिलाध्यक्ष के रूप में माधवराव सिंह परिहार की नियुक्ति हुई है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पार्टी हालिया उपचुनाव की हार के बाद संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की प्रक्रिया में है।

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