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“हिम्मत है तो गोरखपुर से लड़ो”- स्मृति ईरानी का अखिलेश यादव को खुला चैलेंज, सियासत में गरमाई जुबानी जंग

akhilesh

 

“हिम्मत है तो गोरखपुर से लड़ो”- स्मृति ईरानी का अखिलेश यादव को खुला चैलेंज, सियासत में गरमाई जुबानी जंग। वाराणसी से सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है, जहां Smriti Irani ने समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav को सीधी चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा—“अगर हिम्मत है तो अपनी पैतृक सीट छोड़कर गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं।” “हिम्मत है तो गोरखपुर से लड़ो”- स्मृति ईरानी का अखिलेश यादव को खुला चैलेंज, सियासत में गरमाई जुबानी जंग

दरअसल, संसद में दिए गए बयान को लेकर शुरू हुई यह जुबानी जंग अब सड़कों तक आ पहुंची है। Smriti Irani ने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा कि पैतृक सीट से चुनाव जीतना आसान होता है, लेकिन किसी दूसरे के गढ़ में जाकर जीत हासिल करना असली चुनौती होती है।

उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि एक कामकाजी महिला होने के बावजूद उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष Rahul Gandhi को हराकर दिखाया है। यह इशारा 2019 के अमेठी चुनाव की ओर था, जिसने देश की राजनीति में बड़ा संदेश दिया था।

स्मृति ईरानी यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने कहा कि “लोग टैक्स इसलिए नहीं भरते कि संसद में सास-बहू की बातें हों।” साथ ही यह भी जोड़ा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव का विपक्ष में रहना तय है।

वहीं, यह विवाद तब शुरू हुआ जब संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दे पर चर्चा के दौरान Akhilesh Yadav ने स्मृति ईरानी पर “सास-बहू” वाला तंज कसा था। इस टिप्पणी को लेकर ईरानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी तीखा जवाब दिया और कहा कि राजनीति उन्हें विरासत में नहीं मिली, बल्कि उन्होंने मेहनत से अपनी पहचान बनाई है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी चुनौती सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहती है या उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोई नया मोड़ लेकर आती है।

 

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