क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, गांधीग्राम बिनटोली के रहने वाले 11 वर्षीय लड़की और 12 वर्षीय लड़के को ग्रामीणों ने एक साथ देख लिया था। इसके बाद नैतिकता के तथाकथित ठेकेदारों ने उग्र भीड़ का रूप ले लिया। भीड़ ने कानून की प्रक्रिया का इंतजार करने के बजाय खुद ही ‘जज’ बनने का फैसला किया।

सिर मुंडवाया और जबरन रचाई शादी

क्रूरता की हदें तब पार हो गईं जब भीड़ के दबाव में नाबालिग लड़के का आधा सिर मुंडवा दिया गया। इसके बाद सामाजिक दबाव और लड़की के परिजनों की मौजूदगी में दोनों मासूमों की जबरन शादी करा दी गई। जिस उम्र में इन बच्चों को स्कूल में होना चाहिए था, समाज ने उनके गले में जबरन शादी की बेड़ियाँ डाल दीं।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

यह घटना ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम’ का खुला उल्लंघन है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर पुलिस और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या अब भीड़ ही तय करेगी कि किसे क्या सजा दी जानी चाहिए?