
भारतीय रेलवे में ऐतिहासिक बदलाव: नॉन-एसी कोच में बढ़ोतरी, 99% से अधिक नेटवर्क इलेक्ट्रिफाइड
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नॉन-एसी कोच में बढ़ोतरी
सरकार द्वारा नॉन-एसी कोच की संख्या बढ़ाई जा रही है।
यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के लिए लगभग 45% तक सब्सिडी दी जाती है।
विद्युतीकरण में प्रगति
रेलवे नेटवर्क का 99% से अधिक हिस्सा बिजली से संचालित हो रहा है।
लगभग 47,000 किमी ट्रैक इलेक्ट्रिफाई हो चुका है।
इससे ईंधन खर्च कम हुआ और पर्यावरण को लाभ मिला 🌱।
माल ढुलाई (फ्रेट) में बढ़ोतरी
2013-14 में: 1,055 मिलियन टन
अब: लगभग 1,650 मिलियन टन
भारतीय रेलवे अब दुनिया के सबसे बड़े फ्रेट कैरियर्स में से एक है।
ट्रैक निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर
पहले लगभग 15,000 किमी ट्रैक बने थे, अब यह बढ़कर करीब 35,000 किमी हो गया।
रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) की संख्या:
पहले ~4,000
अब ~14,000
🚦 5. सुरक्षा सुधार
ऑटोमैटिक सिग्नलिंग: 1,500 किमी से बढ़कर 4,000+ किमी
ट्रैक मेंटेनेंस, नई तकनीक और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है।
एलएचबी कोच (अधिक सुरक्षित कोच)
हाल के वर्षों में लगभग 48,000 LHB कोच जोड़े गए।
ये कोच अधिक सुरक्षित और आधुनिक माने जाते हैं।
लोकोमोटिव और वैगन
लोकोमोटिव (इंजन): लगभग 12,000
वैगन (माल डिब्बे): 2 लाख से अधिक
🚛 8. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC)
लगभग 2,800 किमी कॉरिडोर तैयार
रोजाना लगभग 480 मालगाड़ियाँ चल रही हैं।
इससे यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही अलग होकर गति और सुरक्षा बढ़ी है।








