अखिलेश के लिए छोड़ा था राजनीतिक मैदान! प्रतीक यादव के निधन से सपा परिवार में निराशा, जानें क्यों चर्चा में रहा उनका त्याग – यशभारत डॉट कॉम
अखिलेश के लिए छोड़ा था राजनीतिक मैदान! प्रतीक यादव के निधन से सपा परिवार में निराशा, जानें क्यों चर्चा में रहा उनका त्याग – यशभारत डॉट कॉम। समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतिक यादव का बुधवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में लखनऊ में निधन हो गया। मात्र 38 वर्ष की आयु में उनके आकस्मिक निधन की खबर ने पूरे उत्तर प्रदेश और सैफई परिवार के समर्थकों को गहरे शोक में डाल दिया है।
अखिलेश के लिए छोड़ा था राजनीतिक मैदान! प्रतीक यादव के निधन से सपा परिवार में निराशा, जानें क्यों चर्चा में रहा उनका त्याग – यशभारत डॉट कॉम”
भाई के लिए ‘त्याग’ की मिसाल थे प्रतीक
प्रतीक यादव राजनीति की चकाचौंध से हमेशा दूर रहे, लेकिन उनकी चर्चा अक्सर अपने भाई और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रति उनके अटूट सम्मान को लेकर होती थी।
-
राजनीतिक विरासत: सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक कभी नहीं चाहते थे कि उनकी कोई भी गतिविधि भाई अखिलेश की राजनीतिक विरासत में बाधा बने।
-
मैनपुरी उपचुनाव का किस्सा: जब मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी में उपचुनाव हुआ, तब प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव के भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोरों पर थीं। कहा जाता है कि प्रतीक यादव ने ही अपर्णा को अपने ससुर की विरासत के खिलाफ चुनाव लड़ने से साफ मना कर दिया था ताकि परिवार में फूट न दिखे।
-
प्रचार से दूरी: उन्होंने न केवल अपर्णा को चुनाव लड़ने से रोका, बल्कि भाभी डिंपल यादव के खिलाफ चुनाव प्रचार करने के भाजपा के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया था।
सैफई से लखनऊ तक शोक की लहर
बुधवार सुबह जैसे ही सोशल मीडिया पर प्रतीक यादव के निधन की खबर फैली, मैनपुरी, इटावा और लखनऊ में शोक की लहर दौड़ गई।
-
अस्पताल में इमरजेंसी: 38 साल की उम्र में निधन के कारणों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे लोग स्तब्ध हैं।
-
परिवार हुआ रवाना: खबर मिलते ही सैफई और मैनपुरी से परिवार के तमाम सदस्य और सपा नेता लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं। अखिलेश यादव और परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्य लखनऊ पहुंच रहे हैं।
मैनपुरी से था गहरा लगाव
प्रतीक यादव भले ही सक्रिय राजनीति में नहीं थे, लेकिन मैनपुरी (मुलायम सिंह जी की कर्मभूमि) के लोगों के साथ उनका व्यक्तिगत लगाव था। जिले के लोग उन्हें एक शांत और सुलझे हुए व्यक्तित्व के रूप में याद कर रहे हैं।

