Thursday, May 21, 2026
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GRMS में फर्जी तरीके से भर्ती हुए तीन साइंटिस्ट, होंगे बर्खास्त

GRMS में फर्जी तरीके से भर्ती हुए तीन साइंटिस्ट, होंगे बर्खास्त  प्रदेश के प्रतिष्ठित गजराराजा मेडिकल कालेज में साइंटिस्ट के तीन पदों पर जो भर्तियां हुईं थीं वह फर्जी निकलीं हैं। संभागायुक्त दीपक सिंह को इस मामले की शिकायत हुई थी जिसमें जांच के बाद पाया कि कई दस्तावेज फर्जी लगाए गए जिस आधार पर नौकरी पाई।

इस पूरे मामले में स्क्रूटनिंग कमेटी भी कटघरे में हैं। जीआरएमसी की कार्यकारिणी की बैठक में तीनों साइंटिस्टों पर कार्रवाई के लिए मुहर लगी और हस्ताक्षर होने के बाद अब कालेज डीन डा अक्षय निगम को एक्शन लेने पत्र भेज दिया गया है।

तीनों साइंटिस्ट अब जल्द बर्खास्त होंगे। खास बात यह कि जो साइंटिस्ट जीआरएमसी में भर्ती हुए उनमें दो महिलाओं के पति कालेज में ही पदस्थ हैं और एक डाक्टर की भतीजी की भी नियुक्ति करा दी गई। इस मामले में कूटरचित दस्तावेजों के कारण एफआइआर भी दर्ज होने की संभावना है।

 

एक के बाद फर्जीवाड़ा आ रहा सामने

यहां यह बता दें कि जीआरएमसी में एक के बाद एक भर्तियों के मामले में फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं। पहले नर्सिंग भर्ती परीक्षा और अब साइंटिस्ट ग्रुप बी,सी और डी के पदों पर भी फर्जीवाड़े से भर्ती सामने आ गई है। इस मामले में पहले से शिकायतें चल रहीं थी लेकिन मामला हाइप्रोफाइल होने के कारण जांचों को आगे नहीं बढ़ाया गया। अब इस मामले में संभागायुक्त दीपक सिंह ने प्राप्त शिकायत की जांच कराई तो कड़ियां खुल गईं। अनुभव प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज फर्जी पाए गए और उच्च शिक्षा विभाग से भी इसकी पुष्टि हुई। इसमें जीआरएमसी के पैथोलाजी विभाग के डा अमित निरंजन की पत्नी शुभ्रा सिंह को साइंटिस्ट ग्रुप बी, फिजियोलाजी विभाग में पदस्थ डा विकास जैन की पत्नी ज्योति को साइंटिस्ट ग्रुप सी और फार्माेकालाजी विभाग के डा एके जैन की भतीजी मीनू जैन हैं।

साइंटिस्ट भर्ती मामला: फर्जीवाड़ा

दो साल पहले जीआरएमसी ने माइक्रोबायोलाजी विभाग में ग्रुप बी, सी तथा डी के साइंटिस्ट के एक-एक पद के लिए विज्ञापन के जरिए भर्ती निकालीं थीं। इसमें जिन तीन साइंटिस्टों के दस्तावेज फर्जी निकले हैं । इनके साथ कई आवेदकों ने आवेदन दिए थे। आवेदकों के दस्तावेजों की जांच के लिए डा केपी रंजन की अध्यक्षता में स्क्रूटनिंग कमेटी बनाई गई, जिसमें डा मनोज बंसल, डा गजेंद्र पाल आदि सदस्य थे। चयन समिति में तत्कालीन डीन डा समीर गुप्ता, जेएएच अधीक्षक डा आरकेएस धाकड़, डा राजकुमार,डा अनिल शामिल थे। इन्होंने शुभ्रा सिंह, ज्योति जैन और मीनू के नाम फायनल कर दिए। इसमें यह भी बताया गया है कि पहले ही स्क्रूटनिंग और चयन समिति वर्तमान तीन साइंटिस्टों के नाम तय कर चुकी थी और प्रक्रिया महज एक दिखावा जैसी थी। इस मामले में जेयू के पूर्व कार्यपरिषद सदस्य मुनेंद्र सोलंकी ने पिछले साल शिकायत की थी जिसके बाद जांच शुरू हुई।

यह अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी

-पीजीडीएसी के सर्टिफिकेट लगाया गया जब जांच हुई तो पता चला कि एथिक्स ग्रुप जिसने यह जारी किया उसे पात्रता ही नहीं थीं। इसी तरह नर्सिंग कालेज में गेस्ट फैकल्टी और कम्प्यूटर डिप्लोमा के प्रमाण पत्र लगाए गए जो उच्च शिक्षा विभाग से जांच के बाद फर्जी निकले। बैक डेट में अनुभव प्रमाण पत्र तैयार कराए गए जिस कारण अब जारी करने वाले संस्थानों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

जांच में सामने आए फर्जी दस्तावेज

जीआरएमसी में साइंटिस्ट के तीन पदों पर भर्ती में फर्जी दस्तावेज लगाए गए यह जांच में सामने आया है। कार्यकारिणी की बैठक में कार्रवाई के लिए अनुमोदन कर डीन को भेज दिया गया है। डीन नियुक्तिकर्ता हैं इसलिए वही कार्रवाई करेंगे।

दीपक सिंह, संभागायुक्त,ग्वालियर-चंबल संभाग

आगे की जाएगी कार्रवाई

जांच रिपोर्ट मिली है, लेकिन अभी उसे पढ़ा नहीं है। पढ़ने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। कुछ न कुछ गड़बड़ी है इसलिए कार्रवाई होना भी तय है।

डा अक्षय निगम, डीन गजराराजा मेडिकल कालेज

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम