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शासकीय कन्या महाविद्यालय में जिला स्तरीय अभिनय एवं सांस्कृतिक विधा का भव्य आयोजन

शासकीय कन्या महाविद्यालय में जिला स्तरीय अभिनय एवं सांस्कृतिक विधा का भव्य आयोज

कटनी शासकीय कन्या महाविद्यालय में जिला स्तरीय अंतर महाविद्यालयीन अभिनय एवं सांस्कृतिक विधा के अंतर्गत प्रथम दिवस अभिनय का आयोजन संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम अभिनय विधा पर केंद्रित रहा, जिसमें माइम, स्किट, मिमिक्री तथा नाटक जैसी विभिन्न विधाओं का प्रदर्शन किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के कुशल मार्गदर्शन एवं संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम ने छात्राओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करने का एक उत्कृष्ट अवसर सृजित किया। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक उत्थान का माध्यम बना, अपितु विभिन्न महाविद्यालयों के बीच सहयोग एवं प्रतिस्पर्धा की भावना को भी मजबूत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात् सभी सम्मानित अतिथियों तथा महाविद्यालयों से आए दल प्रभारियों का स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में उद्योगपति एवं समाजसेवी मनीष गेई उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने उद्बोधन में छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि अवसर मिलने पर अपनी प्रतिभा का पूर्ण प्रदर्शन करना चाहिए। वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। विशिष्ट अतिथि स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं समाजसेवी डॉ. उमा निगम ने भी कार्यक्रम की सराहना की। अन्य विशिष्‍ट अतिथियों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील वाजपेयी तथा शासकीय महाविद्यालय बरही के प्राचार्य डॉ. आर.के. त्रिपाठी शामिल रहे। डॉ. सुनील वाजपेयी ने जिला स्तरीय अभिनय एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिता के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं तथा इसे छात्राओं के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने सभी अतिथियों, प्राचार्यों तथा दल प्रभारियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी के सहयोग की प्रशंसा की । विभिन्न महाविद्यालयों से दल प्रभारी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे, जिनमें शासकीय महाविद्यालय स्लीमनाबाद से डॉ. प्रज्ञा तिवारी, शासकीय महाविद्यालय बरही से डॉ. के.के. निगम, शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय कटनी से डॉ. अनिल तौहेल, शासकीय कन्या महाविद्यालय कटनी से डॉ. रंजना वर्मा तथा साईनाथ इंस्टीट्यूट कटनी से विधि जैन प्रमुख थे। इनके साथ उनके प्रतिभागी छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रतियोगिता की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिवाद समिति का गठन किया गया, जिसमें डॉ. सुषमा श्रीवास्तव, डॉ. हेमलता गर्ग, डॉ. विनय वाजपेयी तथा डॉ. अमिताभ पांडेय शामिल रहे। गणना समिति में डॉ. उर्मिला दुबे, डॉ. रश्मि चतुर्वेदी तथा श्रीमती बंदना मिश्रा ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजयकांत भारद्वाज एवं डॉ. रीना मिश्रा ने कुशलतापूर्वक किया। कार्यक्रम में निर्णायक मंडल के रूप में वेदप्रकाश, व्‍ही एम. इग्नाटियस एवं श्री अनुज मिश्रा ने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई । युवा उत्‍सव समिति आंजनेय तिवारी, डॉ. फूलचंद कोरी, विनीत सोनी डॉ. श्रद्धा वर्मा, रिचा पाण्‍डेय, श्रीमती प्रियंका सोनी, सुश्री पूजा सिंह राजपूत, डॉ. प्रतिमा सिंह डॉ. मैत्रयी शुक्‍ला अपनी भूमिका निभाई । इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें डॉ. साधना जैन, डॉ. विमला मिंज, के.जे. सिन्हा, डॉ. वीणा सिंह, डॉ. सुनील कुमार, विनेश यादव, डॉ. रोशनी पाण्डेय, सुश्री मिथलेश्वरी, सुश्री शिल्पी कुमारी सिंह, पंकज सेन, डॉ. अशुतोष द्विवेदी, डॉ. अनिल द्विवेदी, डॉ. अपर्णा मिश्रा, डॉ. अशोक शर्मा, आंजनेय तिवारी, भीम बर्मन, प्रेमलाल कॉवरे, नम्रता निगम, स्मृति दहायत, डॉ. सोनिया कश्यप, आरती वर्मा, श्रीमती श्वेता कोरी, देववती चक्रवर्ती, विनीत सोनी, सृष्टि श्रीवास्तव, रत्नेश कुशवाहा, डॉ. वंदना चौहान, पूनम गर्ग, मीनाक्षी वर्मा, डॉ. मदन सिंह मरावी, इमरान मोहम्मद तथा सुषमा वर्मा सहित कई अन्य शिक्षक एवं छात्राएं शामिल रहीं। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बनाया।
अभिनय विधा के अंतर्गत विभिन्न प्रस्तुतियां ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। माइम में मौन अभिनय की बारीकियां, स्किट में सामाजिक मुद्दों का चित्रण, मिमिक्री में हास्य का पुट तथा नाटक में गहन भावनाओं का प्रदर्शन देखने को मिला। ये प्रस्तुतियां न केवल मनोरंजन प्रदान करती रहीं, अपितु सामाजिक जागरूकता भी फैलाती रहीं।
यह आयोजन जिला स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। डॉ. चित्रा प्रभात के नेतृत्व में महाविद्यालय ने अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि कला एवं संस्कृति के माध्यम से व्यक्तित्व निर्माण भी आवश्यक है।

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