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कन्या महाविद्यालय में छात्राओं ने होली पर हर्बल कलर (प्राकृतिक रंग) की प्रदर्शनी एवं स्टॉल लगाया

कन्या महाविद्यालय में छात्राओं ने होली पर हर्बल कलर (प्राकृतिक रंग) की प्रदर्शनी एवं स्टॉल लगाय

कटनी -शासकीय कन्या महाविद्यालय, कटनी में होली के अवसर पर एक सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल आयोजन हुआ। प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन में इको क्लब तथा राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में छात्राओं ने हर्बल कलर (प्राकृतिक रंग) की प्रदर्शनी एवं स्टॉल लगाया इस प्रदर्शनी में छात्राओं ने सभी से अपील की कि होली पर रासायनिक रंगों के बजाय प्राकृतिक वस्तुओं से बने रंगों का उपयोग करें। प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने छात्राओं द्वारा तैयार किए गए प्राकृतिक रंगों की खूब सराहना की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रंग त्वचा के लिए लाभदायक होते हैं, जबकि रासायनिक रंग त्वचा, आँखों और बालों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. कुमुद श्रीवास्तव ने भी छात्राओं का मार्गदर्शन किया और उनके प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने रंग बनाने में उपयोग किए गए पदार्थों के बारे में विस्तार से जानकारी ली। महाविद्यालय के अन्य स्टाफ सदस्यों ने भी छात्राओं से हर्बल कलर बनाने की विधि जानी।

छात्राओं ने बताया कि उन्होंने निम्नलिखित प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग कर रंग तैयार किए:
पालक, गाजर, हल्दी, बेसन, चंदन ,पलाश , गुलाब, गेंदा, जैस्मिन, चावल, मैदा, चुकंदर, संतरे के छिलके, अपराजिता के फूल, गुड़हल के फूल आदि।

इको क्लब प्रभारी डॉ. रीना मिश्रा ने छात्राओं के इस प्रयास की सराहना की और भविष्य में इसे लघु उद्योग के रूप में विकसित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने दोहराया कि हर्बल कलर त्वचा, आँखों या बालों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाते, जबकि बाजार के सस्ते रासायनिक रंग शरीर को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष हानि पहुँचाते हैं।

इस अवसर पर डॉ. विमला मिंज, डॉ. अमिताभ पांडे, डॉ. रश्मि चतुर्वेदी, सुश्री शिल्पी सिंह, सुश्री मिथिलेश्वरी, डॉ. प्रतिमा सिंह, डॉ. आशुतोष नारायण द्विवेदी, डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव, डॉ. सोनिया कश्यप, डॉ. अनिल कुमार द्विवेदी, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. फूलचंद कोरी, सृष्टि श्रीवास्तव, श्वेता कोरी, आरती वर्मा, मीनाक्षी वर्मा, सुश्री पूजा सिंह राजपूत,  विनीत सोनी,  अंजनेय तिवारी सहित समस्त स्टाफ और छात्राएँ उपस्थित रहीं।

यह आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य सभी को प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण-अनुकूल होली मनाने का संदेश देना है।

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