स्वामित्व योजना पर ब्रेक: पटवारियों की हड़ताल से एमपी में 48 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री अटकी

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स्वामित्व योजना पर ब्रेक: पटवारियों की हड़ताल से एमपी में 48 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री अटकी

भोपाल: मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आबादी भूमि पर काबिज लोगों को मालिकाना हक देने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ प्रशासनिक अड़चनों में उलझ गई है। प्रदेशभर में पटवारियों द्वारा योजना के तहत होने वाली रजिस्ट्रियों में ‘निष्पादक’ (Executor) की भूमिका निभाने से इनकार करने के कारण पिछले 20 दिनों से काम पूरी तरह ठप्प पड़ा है।

मंगलवार को भोपाल के भदभदा स्थित सहयाद्री परिसर में आयोजित ‘मध्य प्रदेश पटवारी संघ’ के जिलाध्यक्षों की बैठक में यह फैसला दोहराया गया कि पटवारी इस योजना के तहत रजिस्ट्री का काम नहीं करेंगे। पटवारियों के इस कड़े रुख के कारण राज्य में लगभग 48 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का काम अधर में लटक गया है।

क्या है पटवारियों का विरोध और मुख्य तर्क?

मध्य प्रदेश सरकार योजना के तहत करीब 50 लाख ग्रामीण संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने की तैयारी में है, जिस पर राज्य सरकार का 3,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। हालांकि, पटवारी संघ इस प्रक्रिया से खुद को अलग रख रहा है। स्वामित्व योजना पर ब्रेक: पटवारियों की हड़ताल से एमपी में 48 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री अटकी

  • विधिक विवाद की आशंका: मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल और प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी ने बताया कि संघ ने इस विषय पर कानूनी सलाह ली है। पटवारियों का तर्क है कि यदि लीज डीड (पट्टा दस्तावेज) में पटवारी का नाम निष्पादक के रूप में शामिल होता है, तो भविष्य में भूमि स्वामित्व को लेकर कोई भी कानूनी विवाद उत्पन्न होने पर पटवारी को सीधे कोर्ट में पक्षकार (Party) बना लिया जाएगा।

  • पद से हटाने की मांग: पटवारी संघ की स्पष्ट मांग है कि जब तक उन्हें रजिस्ट्री प्रक्रिया में ‘निष्पादक’ की भूमिका से पूरी तरह नहीं हटाया जाता, तब तक वे इस कार्य में सहयोग नहीं करेंगे।

आम जनता और योजना पर असर

  1. 48 लाख रजिस्ट्रियां प्रभावित: पटवारियों के कार्य बहिष्कार के चलते प्रदेश भर में लाखों ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का आधिकारिक मालिकाना हक (प्रॉपर्टी कार्ड व रजिस्ट्री) मिलने में देरी हो रही है।

  2. करोड़ों का बजट और सरकारी लक्ष्य बाधित: सरकार द्वारा तय समय सीमा के भीतर 50 लाख संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री का लक्ष्य इस गतिरोध के कारण पिछड़ता दिख रहा है।

फिलहाल, पटवारी संघ के इस फैसले के बाद राज्य शासन और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने गतिरोध दूर करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।स्वामित्व योजना पर ब्रेक: पटवारियों की हड़ताल से एमपी में 48 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री अटकी