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इंदौर: GST के 8 साल बाद भी तकनीकी खामियों से कारोबारी परेशान, कर विशेषज्ञों ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

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इंदौर: GST के 8 साल बाद भी तकनीकी खामियों से कारोबारी परेशान, कर विशेषज्ञों ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

इंदौर: देश में माल एवं सेवा कर (GST) लागू हुए आठ साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इसके आधिकारिक पोर्टल की तकनीकी खामियां और व्यावहारिक परेशानियां अब भी बनी हुई हैं। आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले मध्य प्रदेश के कर विशेषज्ञों और व्यावसायिक संगठनों ने पोर्टल की इन समस्याओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

कर विशेषज्ञों ने प्रदेश के जीएसटी कमिश्नर को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर पोर्टल की गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है और इसमें तत्काल सुधार की मांग की है।

ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख समस्याएं

  • एंट्री में मामूली त्रुटि पर भारी ब्याज: कर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यापारी ने अपना पूरा टैक्स भर दिया है, लेकिन रिटर्न दाखिल करते समय एंट्री में शब्दों या आंकड़ों की कोई मामूली गलती (Clerical Error) हो गई है, तो सुधार करने पर भी पोर्टल स्वतः ब्याज की मांग निकाल रहा है।

  • एडवांस ITC होने पर भी वसूली: यदि किसी व्यापारी के इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में एडवांस में इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) जमा है, तब भी पोर्टल द्वारा अनुचित रूप से ब्याज की वसूली दिखाई और मांगी जा रही है।

  • पोर्टल की धीमी गति और सर्वर एरर: काउंसिल की बैठक से ठीक पहले कर सलाहकारों ने स्पष्ट किया कि रिटर्न फाइलिंग के अंतिम दिनों में पोर्टल का सर्वर धीमा हो जाता है, जिससे व्यापारियों को पेनल्टी और लेट फीस भरने पर मजबूर होना पड़ता है।

कर विशेषज्ञों की मांगें

  1. पोर्टल में लॉजिकल सुधार: क्लैरिकल एरर और टैक्स समायोजन से जुड़ी समस्याओं के लिए पोर्टल के सॉफ्टवेयर में तकनीकी सुधार किया जाए।

  2. गलत ब्याज मांग पर रोक: जहां व्यापारी का टैक्स जमा है या क्रेडिट लेजर में राशि उपलब्ध है, वहां ऑटो-जनरेटेड ब्याज मांग को तुरंत रोका जाए।

  3. जीएसटी काउंसिल में मुद्दा उठाने की अपील: राज्य के कर अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे इन व्यावहारिक समस्याओं को आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक के एजेंडे में शामिल करवाएं।