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डिजिटल बेइज्जती ने तोड़ा दम: इंस्टाग्राम पर पत्नी का वीडियो देख इंजीनियर पति ने दी जान, सुसाइड नोट में लिखा- ‘मैं अब और नहीं सह सकता’

हैदराबाद। 1 मई 2026: डिजिटल बेइज्जती ने तोड़ा दम: इंस्टाग्राम पर पत्नी का वीडियो देख इंजीनियर पति ने दी जान, सुसाइड नोट में लिखा- ‘मैं अब और नहीं सह सकता’। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर 36 वर्षीय सीताराम की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। हुसैन सागर झील में कूदकर जान देने वाले सीताराम ने पीछे जो 19 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा है, वह एक ऐसे पति की बेबसी बयां करता है जिसने अपनी पत्नी को सब कुछ दिया, लेकिन बदले में उसे सार्वजनिक अपमान मिला।

डिजिटल बेइज्जती ने तोड़ा दम: इंस्टाग्राम पर पत्नी का वीडियो देख इंजीनियर पति ने दी जान, सुसाइड नोट में लिखा- ‘मैं अब और नहीं सह सकता’

मामले के 5 मुख्य बिंदु:

  1. शादी और विश्वासघात: सीताराम और रेणुका की शादी 2018 में हुई थी। दोनों आर्थिक रूप से संपन्न थे और सॉफ्टवेयर क्षेत्र में कार्यरत थे। सीताराम के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब उसे अपनी पत्नी के तीन अन्य पुरुषों (रमणा रेड्डी, श्रवण और एक अन्य) के साथ अवैध संबंधों का पता चला।

  2. डिजिटल दुःस्वप्न (Instagram कांड): सीताराम के लिए सबसे बड़ा सदमा तब था जब उसने अपनी पत्नी के निजी पलों के वीडियो इंस्टाग्राम पर देखे। आरोपी रमणा रेड्डी ने कथित तौर पर इन वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था, जिससे सीताराम का मानसिक संतुलन पूरी तरह हिल गया।

  3. सुसाइड नोट की चीख: सीताराम ने लिखा, “आखिर एक पत्नी को क्या चाहिए? मैं अपनी पत्नी के अश्लील वीडियो कैसे देख सकता था?” नोट से स्पष्ट है कि वह पिछले डेढ़ साल से घुट-घुट कर जी रहा था और घर पर अपनी पत्नी के प्रेमियों के आने-जाने से बेहद परेशान था।

  4. ब्लैकमेलिंग का शक: पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या सीताराम को उन वीडियो के जरिए ब्लैकमेल किया जा रहा था या उनकी पत्नी और प्रेमी मिलकर उसे मानसिक प्रताड़ना दे रहे थे।

  5. कानूनी कार्रवाई: साइबराबाद पुलिस ने सुसाइड नोट को मुख्य आधार बनाते हुए पत्नी रेणुका, रमणा रेड्डी और एक अन्य को हिरासत में लिया है। मामला ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ (Abetment to Suicide) की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

रिश्तों और डिजिटल सुरक्षा पर सवाल

यह मामला केवल एक एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर का नहीं है, बल्कि यह “रिवेंज पोर्न” और “साइबर बुलिंग” का भी एक भयावह उदाहरण है।

  • निजता का हनन: किसी के निजी वीडियो रिकॉर्ड करना और उन्हें सोशल मीडिया पर डालना एक गंभीर कानूनी अपराध है।

  • मानसिक स्वास्थ्य: सीताराम जैसे शिक्षित व्यक्ति का यह कदम बताता है कि सामाजिक लोक-लाज और डिजिटल अपमान किसी को भी हताशा की उस सीमा तक धकेल सकता है जहाँ उसे मौत आसान लगने लगती है।

पुलिस की अगली कार्रवाई

पुलिस अब सीताराम और आरोपियों के फोन की फोरेंसिक जांच (FSL) करवा रही है। इंस्टाग्राम से उन वीडियो को हटाने और उनके ओरिजिनल अपलोडर का डेटा जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 19 पन्नों का वह पत्र अब इस केस का सबसे बड़ा ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ बन चुका है।

YASHBHARAT.COM (हमारा उद्देश्य खबरों के माध्यम से समाज को जागरूक करना है। यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। आत्महत्या समाधान नहीं है।)

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि