शपथ ग्रहण मंच पर भावुक क्षण: PM मोदी ने लिया 98 वर्षीय माखनलाल सरकार का आशीर्वाद; कौन हैं बंगाल BJP के ये ‘भीष्म पितामह’?
शपथ ग्रहण मंच पर भावुक क्षण: PM मोदी ने लिया 98 वर्षीय माखनलाल सरकार का आशीर्वाद; कौन हैं बंगाल BJP के ये ‘भीष्म पितामह’?। शनिवार, 09 मई 2026: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का मंच केवल सत्ता परिवर्तन का गवाह नहीं बना, बल्कि यह भारतीय राजनीति के ‘संस्कारों’ का भी गवाह बना। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर मौजूद 98 वर्षीय माखनलाल सरकार के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, तो पूरा ब्रिगेड परेड ग्राउंड तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
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कौन हैं माखनलाल सरकार, जिन्हें आज की भाजपा अपनी जड़ों का सबसे मजबूत सिपाही मानती है? आइए जानते हैं उनके संघर्ष की अनसुनी कहानी:
1. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ कश्मीर आंदोलन के साक्षी
माखनलाल सरकार का राष्ट्रवाद के प्रति समर्पण 74 साल पुराना है।
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वर्ष 1952: जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का नारा देकर कश्मीर कूच किया था, तब माखनलाल उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले थे।
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गिरफ्तारी: कश्मीर में तिरंगा फहराने के संकल्प के कारण उन्हें वहां जेल में भी रहना पड़ा था।
2. बंगाल भाजपा के ‘नींव के पत्थर’
1980 में जब भाजपा का गठन हुआ, तब बंगाल में कमल खिलाना किसी सपने जैसा था। लेकिन माखनलाल सरकार ने इसे चुनौती के रूप में लिया:
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संगठन विस्तार: उन्हें उत्तर बंगाल (दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग) का जिम्मा मिला।
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असाधारण रिकॉर्ड: महज एक साल में उन्होंने 10,000 से अधिक सदस्य जोड़े।
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लगातार 7 साल जिलाध्यक्ष: उस दौर में जब पद दो साल के लिए मिलते थे, माखनलाल अपनी कार्यकुशलता के कारण लगातार 7 वर्षों तक जिलाध्यक्ष रहे।
3. प्रधानमंत्री का संदेश: “पुराने सिपाहियों को भूलती नहीं भाजपा”
मंच पर माखनलाल सरकार को दिया गया यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन हजारों गुमनाम कार्यकर्ताओं का सम्मान है जिन्होंने वामपंथी और टीएमसी के दशकों लंबे शासन के बीच पार्टी की मशाल जलाए रखी। 98 वर्ष की आयु में भी उनकी चमक और निष्ठा यह बताती है कि बंगाल में आज मिली 207 सीटों की जीत के पीछे दशकों का पसीना और त्याग छिपा है

