EMI, Personal Loan, Home Loan लेने वाले ध्‍यान दें, लोन मोरेटोरियम पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 14 दिसंबर को

EMI, Personal Loan, Home Loan लेने वालों के लिए फिर से महत्‍वपूर्ण सूचना है कि लोन मोरेटोरियम के मामले में लगातार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का दौर चल रहा है। आम जनता को मोरेटोरियम पीरियड में छूट की राहत मिलना चाहिये या नहीं, मिलना चाहिये तो कितनी, इन सभी बिंदुओं पर दलीलें दी जा रही हैं। आज 9 दिसंबर को सुबह से चली सुनवाई के बाद अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने तारीख बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 14 दिसंबर तक स्थगित कर दी है। कोरोना महामारी के मद्देनजर टर्म लोन पर ब्याज की मियाद बढ़ाने और ब्याज पर छूट देने की याचिका पर सुनवाई के दौरान आज भी कई दलीलें पेश की गईं। ब्याज माफी के खिलाफ केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यदि ब्याज सभी प्रकार के ऋणों पर छूट दी जाती है, तो माफ की गई राशि 6 ​​लाख करोड़ रुपये से अधिक होगी; इस कारण ब्याज माफी पर भी विचार नहीं किया गया। यह बैंकों के निवल मूल्य का एक बड़ा हिस्सा मिटा देगा, बैंकों के अस्तित्व के बारे में गंभीर सवाल उठाएगा। अकेले एसबीआई के लिए, ब्याज माफी बैंकों के निवल मूल्य का आधा हिस्सा मिटा देगी। जमाकर्ताओं के लिए निरंतर भुगतान महत्वपूर्ण, प्रत्येक उधारकर्ता के लिए लगभग 8.5 जमाकर्ता हैं। लोन मोरेटोरियम की अवधि बढ़ाने व ब्याज पर ब्याज में छूट की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि मोरेटोरियम अवधि में सभी लोनधारकों को ब्याज पर ब्याज में छूट देना अव्यावहारिक होता। इस छूट से छह लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ता और बैंकों की नेटवर्थ का अच्छा खासा हिस्सा इसमें चला जाता। कोरोना के कारण आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए मार्च से अगस्त के दौरान लोन की किस्तें टालने (लोन मोरेटोरियम) का फैसला किया गया था। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अशोक भूषण, आरएस रेड्डी और एमआर शाह की पीठ को बताया कि अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को देखते हुए ही लोगों को किस्त चुकाने से छूट दी गई थी, लेकिन ब्याज पर छूट नहीं दी गई।

ब्‍याज पर ब्‍याज से मिली थी छूट

केंद्र सरकार ने दो करोड़ रुपये तक के पर्सनल व एमएसएमई लोन के लिए मोरेटोरियम अवधि में ब्याज पर ब्याज में छूट का एलान किया था। लोन मोरेटोरियम का लाभ नहीं लेने वाले कर्जधारकों को भी साधारण ब्याज एवं चक्रवृद्धि ब्याज के अंतर के बराबर की राशि उनके खाते में दी गई है। कोरोना संकट के मद्देनजर कर्जधारकों को बैंक से लिए दो करोड़ रुपये तक के कर्ज पर 31 अगस्त तक किस्त चुकाने की बाध्यता से राहत दी गई थी। अवधि की समाप्ति के बाद बैंकों द्वारा कर्जधारकों से छूट की अवधि के ब्याज पर ब्याज वसूले के मामले को सुप्रीम कोर्ट देख रहा है।

9 दिसंबर की सुनवाई के मुख्‍य अंश

तुषार मेहता ने यह कहा

जानिये 8 दिसंबर की सुनवाई की सारी अपडेट

-“उधारकर्ताओं को चक्रवृद्धि ब्याज का भुगतान करना पड़ता है क्योंकि इसकी एक श्रृंखला है। कुछ लोगों ने स्थगन लिया, लेकिन हमें उधारकर्ताओं को अपनी निधि से सभी के लिए ब्याज देना पड़ा और उन्हें उच्च और शुष्क नहीं छोड़ सकते क्योंकि हम अधिस्थगन लेने वालों को लाभ दे रहे थे।”

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