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Electricity Bill : आंकड़ों में ऐसे हेराफेरी कर लगाया जा रहा बिजली उपभोक्ताओं को चूना

भोपाल । देश में सर्वाधिक बिजली का बिल वसूलने वाले राज्यों में शामिल मप्र में बिजली कंपनियां आंकड़ों में हेरफेर कर अधिक घाटा बता रही हैं। इसी के आधार पर कंपनियों द्वारा हर साल टैरिफ बढ़ाए जाने की मांग विद्युत विनियामक आयोग से करती हैं। जिसके चलते घरेलू उपभोक्ताओं को हर साल बिजली बिल के रूप में चूना लगता है।
यह आरोप आपत्तिकर्ताओं ने बिजली कंपनियों पर लगाए हैं। फिलहाल लॉकडाउन की वजह आयोग में सुनवाई स्थगित चल रही है। तय है कि लॉकडाउन खुलने के बाद आयोग में सुनवाई होगी और बिजली की दर में 6 फीसदी तक की वृद्धि की जा सकती है। फिलहाल आयोग के पास अब तक 44 आपत्तियां आ चुकी हैं। इनमें से 13 आपत्तियां स्थानीय लोगों की हैं।
इन आपत्तियों पर अलग-अलग सुनवाई की जानी है। भोपाल की आपत्तियों की सुनवाई 23 मार्च को तय की गई थी, जिसे कोरोना महामारी के चलते स्थगित किया जा चुका है।
अब सुनवाई नई तारीख तय होने के बाद की जाएगी। गौरतलब है कि करीब छह महीने पहले बिजली कंपनियों ने 2 हजार करोड़ का घाटा बताकर एक बार फिर बिजली का टैरिफ बढ़ाए जाने का प्रस्ताव विद्युत विनियामक आयोग को दिया था। प्रस्ताव में कंपनियों ने इस बार नगरीय निकाय और किसानों को मिलने वाली बिजली में 6 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोत्तरी करने की मांग की है। इसी तरह से घरेलू बिजली में भी 5 फीसदी से अधिक की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया है।
इससे माना जा रहा है कि आयोग बिजली कंपनियों के प्रस्ताव पर 5 से 6 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी इस बार कर सकता है। इससे महज छह से 7 महीने में ही दूसरी बार बिजली के टैरिफ में बढ़ोत्तरी हो जाएगी। दरअसल कंपनियां लाइन लॉस, बिजली खरीदी सहित अन्य खर्च के बहाने घाटा बताकर हर साल बिजली के टैरिफ में बढ़ोत्तरी करा लेती हैं।
कंपनियों के इस प्रस्ताव पर आयोग ने आपत्तियां और सुझाव बुलाए थे। अब इन पर सुनवाई होना है। सुनवाई के बाद बिजली के दामों में बढ़ोत्तरी होना तय है। माना जा रहा है कि बिजली के दामों यह बढ़ोत्तरी जुलाई माह के आसपास हो सकती है।
आपत्तियों में यह लगाए आरोप
– लेखा विवरण तैयार करने में अवैध प्रणाली का किया गया उपयोग।
– बीते पांच सालों की सत्यापन याचिकाओं के वित्तीय प्रभार का उल्लेख नहीं किया।
– प्रस्ताव में बिजली की उपलब्धता और सरप्लस बिजली का विश्लेषण नहीं किया।
– बिजली कंपनियों ने सोलर उर्जा लागत की गलत जानकारी दी।
– बिजली की जरुरत और कंपनियों की अक्षमता का विश्लेषण नहीं किया गया।
वर्तमान में बिजली का टैरिफ
50 यूनिट तक 4.5 रुपए प्रति यूनिट
51 से 150 यूनिट 4.95 रुपए प्रति यूनिट
151 से 300 यूनिट 6.30 रुपए प्रति यूनिट
300 यूनिट से अधिक 6.50 रुपए प्रति यूनिट
बढ़ाए जाने के लिए प्रस्तावित टैरिफ
50 यूनिट तक 4.35 रुपए प्रति यूनिट
51 से 150 यूनिट 5.25 रुपए प्रति यूनिट
151 से 300 यूनिट 6.60 रुपए प्रति यूनिट
300 यूनिट से अधिक 6.80 रुपए प्रति यूनिट

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