
धर्म डेस्क। यूं तो लगभग महीने भर चलने वाले रमजान के बाद ईद मनाई जाती है लेकिन रमज़ान की आखिरी रात का चांद ही बताता है कि अगले दिन ईद होगी या नहीं। इस बार भारत में केरल राज्य को छोड़कर ईद 16 जून को मनाई जा रही है। आज अधिकांश हिस्सों में चांद दिखते ही मुबारकबाद का सिलसिला शुरू हो गया।
ईद मुसलमानों का सबसे पाक त्योहार माना जाता है। मुसलमानों के लिए यह एक ऐसा दिन होता है जब वो खुशियां मनाते हैं, दावत का लुत्फ उठाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और ईदगाह जाकर खुदा की इबादत करते हैं। मुसलमानों के अलावा दूसरे धर्मों के लोग भी ईद के जश्न में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। ईद कब मनाई जाएगी इसका फैसला चांद तय करता है। यूं तो लगभग महीने भर चलने वाले रमजान के बाद ईद मनाई जाती है लेकिन रमज़ान की आखिरी रात का चांद ही बताता है कि अगले दिन ईद होगी या नहीं। इस बार भारत में केरल राज्य को छोड़कर ईद 16 जून को मनाई जा रही है।
इस्लाम में ऐसी मान्यता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद ने बद्र के युद्ध में फतह हासिल की थी जिसकी खुशी में ईद-उल-फितर मनाई जाती है। ये भी माना जाता है कि पहली बार ईद-उल-फितर 624 ईस्वी में मनाई गई थी। मुसलमान ईद के इस त्यौहार पर मीठे पकवान बनाते और खाते हैं। घर में अपने से छोटों को ईदी भी देने का रिवाज है। इसका अलावा जरूरतमंदों को दान देकर भी अल्लाह को याद किया जाता है। इस दान को इस्लाम में फितरा कहते हैं। इस फितरे के चलते ही इस त्यौहार को ईद उल-फितर कहा जाता है।









