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Dimple Yadav: मैनपुरी में टूटेगा सपा का ‘तिलिस्म’, क्या डिंपल यादव की फंस गई सीट? मुख्य मुकाबले से ये बाहर

Dimple Yadav: मैनपुरी में टूटेगा सपा का ‘तिलिस्म’, क्या डिंपल यादव की फंस गई सीट? मुख्य मुकाबले से ये बाहर, मैनपुरी की सियासत में 4 जून का दिन अहम है। यहीं से मुलायम के गढ़ की नई सियासी पटकथा लिखी जाएगी। ये पटकथा ही तय करेगी कि अब मैनपुरी पर डिंपल यादव राज करेंगी या फिर दशकों से जीत का ख्वाब देख रही भाजपा इस बार सपाई गढ़ को ध्वस्त कर भगवा फहराएगी।

मुलायम की कर्मभूमि कही जाने वाली मैनपुरी में इस बार सियासी घमासान मचा हुआ है। एक तरफ मुलायम की पुत्रवधू और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव मैदान में हैं, तो वहीं दूसरी तरफ योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह पर कमल खिलाने का जिम्मा है। ऐसे में मैनपुरी का चुनाव इस बार काफी अहम है। ये चुनाव ही तय करेगा कि मुलायम के बाद अब सैफई परिवार की बादशाहत मैनपुरी सीट पर कामय रहेगी या भाजपा इस गढ़ को भी ध्वस्त करने में कामयाब हो जाएगी।

अगर इस चुनाव में डिंपल यादव जीतती हैं तो उनके ऊपर दूसरा चुनाव हारने का जो दाग लगा हुआ है वह भी धुल जाएगा। वहीं अगर जयवीर सिंह जीतते हैं तो मैनपुरी में आज तक कमल न खिलने का मिथक टूट जाएगा। 4 जून यानी कल सुबह 8 बजे से इसके लिए नवीन मंडी में मतगणना शुरू होगी। दोपहर 12 बजे तक मैनपुरी की सियासी तस्वीर साफ हो जाएगी।

मुख्य मुकाबले से बाहर हैं अन्य प्रत्याशी
वैसे तो मैनपुरी लोकसभा सीट से सपा और भाजपा के अलावा बसपा प्रत्याशी शिवप्रसाद यादव समेत कुल 6 प्रत्याशी मैदान में हैं। लेकिन मुख्य मुकाबला सपा और भाजपा में ही है। बसपा भी इस मुख्य मुकाबले से बाहर है।

सपाइयों का मंडी का बाहर डेरा
मैनपुरी स्थित नवीन मंडी के बाहर सपाइयों का डेरा है। दरअसल वे स्ट्रांग रूम की निगरानी के लिए वहां मौजूद हैं। सपा नेतृत्व की ओर से ईवीएम की निगरानी की अपील की गई थी। इसके चलते ही सपा कार्यकर्ता दिन रात मंडी के बाहर जमे हुए हैं। मतगणना पूरी होने के बाद ही वे यहां से हटेंगे।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम