Wednesday, May 27, 2026
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DATA STORY: धरती पर जीवों से ज्यादा हुआ सामान का भार, जानें-कैसे हुआ यह सब

नई दिल्ली । 2020 में दुनिया के पौधों, जानवरों और मनुष्यों का कुल भार कंक्रीट, डामर और ईंटों से कम हो गया है। इजराइल स्थित विजमन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडल के जरिए किए गए नए शोध में यह दावा किया है।

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इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर का सहारा लिया, जिससे सामान के कुल भार का आकलन किया जा सके।
शोध में पाया गया कि वर्ष 2020 में सामान का भार 1.1 टेराटन धरती पर मौजूद कुल जैविक भार से ज्यादा हो जाएगा। वहीं अगर इसी रफ्तार से वृद्धि होती रही तो 2040 तक मानव निर्मित सामान का भार 3 टेराटन से ज्यादा होने की संभावना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मानवजनित द्रव्यमान 1990 से ही तेजी से बढ़ रहा है। तब यह जैविक भार का मात्र तीन फीसदी था। वर्तमान में हर साल 30 गीगाटन मावननिर्मित द्रव्यमान का उत्पादन हो रहा है।
याद रहे कि एक गीगाटन एक अरब टन के बराबर होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 120 सालों में धरती पर मौजूद जैविक भार घटा है, लेकिन इसकी तुलना में सामान के भार में कई गुना की वृद्धि हुई है। सर्वश्रेष्ठ आकलन के मुताबिक धरती पर मौजूद जीवों का कुल भार एक टेराटन है। यह शोध नेचर मैग्जीन में प्रकाशित हुआ है।
सबसे ज्यादा कंक्रीट का बोझ

धरती पर मानव निर्मित चीजों में कंक्रीट का भार सबसे तेजी से बढ़ रहा है। मानव निर्मित सामान के भार में कंक्रीट की हिस्सेदारी करीब 40 फीसद है। हर साल 549 गीगाटन कंक्रीट का उत्पादन होता है। जबकि पिछली सदी में 1980 में केवल 86 गीगाटन कंक्रीट का उत्पादन हुआ था। तब कुल सामान में कंक्रीट की हिस्सेदारी एक चौथाई थी। वर्तमान में कंक्रीट के बाद मानव निर्मित सामान में धरती पर बजरी( 386 गीगाटन (ईंट(कुल वजन का 10 फीसद), डामर, धातु, लकड़ी, शीशे और प्लास्टिक का वजन है।

धरती पर किस चीज का कितना भार

4 गीगाटन है धरती पर जानवर और जीवों का भार

8 गीगाटन है प्लास्टिक का वजन

900 गीगाटन है कुल पेड़ और झाड़ियों का वजन

1100 गीगाटन है कंक्रीट का कुल भार

कब सबसे ज्यादा और कब सबसे कम हुआ सामान का उत्पादन

1945 से द्वितीय विश्व युद्ध के अंत तक और 1973 के तेल संकट के दौरान सबसे ज्यादा सामान का उत्पादन हुआ। वहीं प्रथम विश्व युद्ध, ग्रेट डिप्रेशन और डॉटकॉम क्रैश के दौरान सबसे कम सामान का निर्माण हुआ।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम