Latest

Dalit Card In UP Rajniti: मल्लिकार्जुन खरगे के रूप में दलित कार्ड, बाराबंकी या इटावा से उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा

Dalit Card In UP Rajniti: मल्लिकार्जुन खरगे के रूप में दलित कार्ड, बाराबंकी या इटावा से उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाकर और अपने कठोर हिंदुत्व प्लान के जरिए दलित मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने में बड़ी सफलता पाई थी। ऐसे में यदि कांग्रेस मल्लिकार्जुन खरगे के रूप में दलित कार्ड खेलती है तो इससे भाजपा को भी बड़ा नुकसान हो सकता है।

क्या है योजना
दरअसल, चर्चा है कि कांग्रेस यूपी में अपनी वापसी के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है। इसके लिए राहुल गांधी के साथ-साथ प्रियंका गांधी को भी प्रदेश की किसी सीट से चुनाव लड़ाया जा सकता है। अब इससे भी एक कदम आगे बढ़ते हुए कांग्रेस ने अपने दलित नेता और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भी मैदान में उतारने का प्लान बना लिया है। उन्हें बाराबंकी या इटावा से उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा चल रही है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश या दलित मतदाता बहुल पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूती दे सकती है। यदि ऐसा हुआ तो अब तक मायावती के साथ मजबूती के साथ खड़े रहे दलित मतदाताओं की एक बड़ी संख्या कांग्रेस के पक्ष में मुड़ सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाकर और अपने कठोर हिंदुत्व प्लान के जरिए दलित मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने में बड़ी सफलता पाई थी। 2014 से लेकर 2022 तक भाजपा की यही योजना उसे यूपी में बड़ी ताकत बनाने में सबसे कारगर साबित हुई है। ऐसे में यदि कांग्रेस मल्लिकार्जुन खरगे के रूप में दलित कार्ड खेलती है तो इससे भाजपा को भी बड़ा नुकसान हो सकता है।

दलित कांग्रेस से क्यों जुड़ेंगे
दरअसल, कांग्रेस का यह आइडिया आधारहीन नहीं है। कर्नाटक चुनाव में यह देखा गया है कि दलित मतदाताओं ने जनता दल सेक्युलर जैसी स्थानीय पार्टियों को वोट देने की बजाय निर्णायक भूमिका निभाने वाली कांग्रेस को वोट देना बेहतर समझा। यही कारण है कि एक तरफ जेडीएस के वोट घट गए तो कांग्रेस को वोट शेयरों में बड़ा उछाल आ गया।

कांग्रेस नेता मान रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में भी दलित मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग मायावती की प्रभावहीन होती भूमिका से निराश है। वह अपने लिए विकल्प खोज रहा है। इसी विकल्प की तलाश में अति दलित जातियां तो भाजपा के साथ चली गई हैं, लेकिन जाटव के साथ-साथ कुछ जातियां अभी भी अपने लिए विकल्प तलाश रही हैं। कांग्रेस इन्हीं जातियों को अपने साथ जोड़ने की योजना बना रही है।

अभी तक यह चर्चा थी कि कांग्रेस मायावती को इंडिया गठबंधन के खेमे में लाने के लिए प्रयास कर रही है। लेकिन चुनाव पूर्व गठबंधन न करने के बसपा के इतिहास और मायावती के बयान को देखते हुए माना जा रहा है कि उनका इंडिया गठबंधन में चुनाव पूर्व न आना तय हो गया है। यही कारण है कि अब कांग्रेस मल्लिकार्जुन खरगे के सहारे दलित कार्ड खेलने की तैयारी कर रही है।

 

 

 

 

Back to top button