उज्जैन का चिंतामण गणेश मंदिर: उज्जैन के इस गणेश मंदिर जाते ही हो जाती है मनोकामना पूर्ती, रक्षासूत्र बांधते ही होती है संतान कामना पूर्ती
उज्जैन का चिंतामण गणेश मंदिर: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित चिंतामण गणेश मंदिर अपने अनोखे धार्मिक महत्व के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भगवान गणेश तीन अलग-अलग रूपों में विराजमान हैं – चिंताओं का हरण करने वाले चिंतामण गणेश, इच्छाओं को पूरा करने वाले इच्छामण गणेश, और रिद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाले सिद्धिविनायक। यहां भक्तों की मान्यता है कि भगवान गणेश की कृपा से उनके जीवन की सभी समस्याओं का समाधान हो जाता है और उनकी हर इच्छा पूरी होती है।
उज्जैन शहर से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां की सबसे दिलचस्प बात यह है कि भक्त गणेश जी से उल्टा स्वास्तिक बनाकर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं और जब वह पूरी हो जाती हैं, तो सीधा स्वास्तिक बनाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और भक्तों का कहना है कि यहां हर प्रार्थना का जवाब मिलता है।
रक्षा सूत्र बांधने की प्रथा और संतान प्राप्ति का अनोखा रिवाज
यहां एक और खास मान्यता है – रक्षा सूत्र बांधने की। भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए गणेश जी को रक्षा सूत्र बांधते हैं और जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वापस आकर इस रक्षा सूत्र को खोलते हैं। अगर किसी दंपत्ति को संतान प्राप्त होती है, तो वे बच्चे के वजन के बराबर लड्डू भगवान गणेश को अर्पित करते हैं – यह परंपरा मंदिर की एक अद्वितीय पहचान है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व और लक्ष्मण बावड़ी की कथा
चिंतामण गणेश मंदिर का इतिहास भी बेहद रोचक है। कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता ने की थी। वनवास के दौरान, जब माता सीता को प्यास लगी, तब लक्ष्मण ने यहां तीर चलाया और धरती से जल निकला। उसी स्थान पर लक्ष्मण बावड़ी का निर्माण हुआ, जिसे आज भी दर्शन के लिए देखा जा सकता है। लोग मानते हैं कि भगवान राम ने चिंतामण गणेश, लक्ष्मण ने इच्छामण गणेश और माता सीता ने सिद्धिविनायक की पूजा की थी।
मंदिर का वर्तमान स्वरूप महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा लगभग 250 साल पहले बनवाया गया था। गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। खासकर बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन यहां भक्तों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं।

