जापान की जुगलबंदी से उड़े चीन के होश- आंध्र प्रदेश में ₹2,250 करोड़ का जापानी निवेश; ‘रेयर अर्थ्स’ मार्केट से खत्म होगी ड्रैगन की दादागिरी
ग्लोबल बिजनेस डेस्क: एशिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी होने का दंभ भरने वाले चीन के लिए आने वाले दिन बेहद सिरदर्द भरे होने वाले हैं। भारत और जापान ने मिलकर चीन के ‘रेयर अर्थ्स’ साम्राज्य को हिलाने के लिए एक बेहद गुप्त और बड़ी डील को अंजाम दे दिया है।
जिस तरह भारत आज सेमीकंडक्टर के मोर्चे पर दुनिया में आत्मनिर्भर बनने की राह पर तेजी से आगे निकल चुका है, ठीक उसी तरह अब ‘रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ के मोर्चे पर भी भारत इतिहास रचने जा रहा है। इसके लिए जापान की एडवांस्ड मटीरियल्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी भारत के आंध्र प्रदेश में 2,250 करोड़ रुपए का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है। इस कदम का सीधा लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय बाजार से चीन की मोनोपॉली (एकाधिकार) को पूरी तरह मटियामेट करना है।
हो गई महा-डील: आंध्र प्रदेश के अच्युतापुरम में लगेगा मेगा प्लांट
इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक, जापान की दिग्गज कंपनी ‘प्रोटेरियल’ (Proterial) आंध्र प्रदेश में इस बड़े प्रोजेक्ट को लगाने जा रही है:
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कहाँ लगेगा प्लांट: यह हाई-टेक प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले के अच्युतापुरम में स्थापित किया जाएगा।
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क्या होगा उत्पादन: यहाँ हर साल 1.2 किलो टन (ktpa) ‘सिंटर्ड नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन’ ($NdFeB$) परमानेंट मैग्नेट का उत्पादन किया जाएगा।
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इतनी जरूरी क्यों है ये मैग्नेट? यह विशेष मैग्नेट दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीकों जैसे— इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), विंड टर्बाइंस, इंडस्ट्रियल मोटर्स, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और देश के सबसे संवेदनशील डिफेंस (रक्षा) सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला सबसे मुख्य पार्ट है।
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सरकारी हरी झंडी: आंध्र प्रदेश राज्य की ‘इन्वेस्टमेंट प्रमोशन कमेटी’ ने पिछले हफ्ते हुई एक हाई-लेवल बैठक में इस मेगा प्रोजेक्ट को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। जापान की जुगलबंदी से उड़े चीन के होश- आंध्र प्रदेश में ₹2,250 करोड़ का जापानी निवेश; ‘रेयर अर्थ्स’ मार्केट से खत्म होगी ड्रैगन की दादागिरी
चीन की दादागिरी पर लगेगी लगाम; केंद्र सरकार का मास्टरस्ट्रोक
यह प्रस्तावित निवेश एक बहुत ही सोची-समझी रणनीतिक टाइमिंग पर हो रहा है:
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चीन पर निर्भरता होगी शून्य: वर्तमान में दुनिया के अधिकांश देशों को इन महत्वपूर्ण रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए चीन के आगे हाथ फैलाना पड़ता है। चीन अक्सर इसका इस्तेमाल देशों को ब्लैकमेल करने के लिए रणनीतिक हथियार के रूप में करता है। भारत इस प्रोजेक्ट से चीन पर अपनी निर्भरता को खत्म कर देगा।
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सरकार देगी विशेष इंसेंटिव: मोदी सरकार ने हाल ही में ‘सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ के घरेलू उत्पादन को तेजी से बढ़ावा देने के लिए एक विशेष इंसेंटिव प्रोग्राम (PLI जैसी योजना) को मंजूरी दी है, जो इसके राष्ट्रीय और रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
जानिए कितनी ताकतवर है जापान की कंपनी ‘प्रोटेरियल’
इस प्रोजेक्ट को लगाने वाली कंपनी कोई साधारण कंपनी नहीं है:
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हिताची ग्रुप से कनेक्शन: प्रोटेरियल को पहले दुनिया भर में ‘हिताची मेटल्स’ (Hitachi Metals) के नाम से जाना जाता था। इसे $NdFeB$ मैग्नेट टेक्नोलॉजी में दुनिया का बेताज बादशाह माना जाता है।
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₹45,000 करोड़ का साम्राज्य: इस जापानी दिग्गज ने पिछले वित्त वर्ष में 45,000 करोड़ रुपए का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया था। इसका नेटवर्क नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, एशिया और खुद चीन में भी फैला हुआ है। अब इस कंपनी का सबसे बड़ा रणनीतिक बेस भारत बनने जा रहा है।
