मध्यप्रदेश

Child Helpline 1098: एमपी में संकटग्रस्त बच्चों का सुरक्षा कवच बनी चाइल्ड हेल्पलाइन, एक साल में 30 हजार से अधिक मासूमों को मिला नया जीवन

सीएम डॉ. मोहन यादव की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का असर; संकट में फंसे बच्चों को तुरंत रेस्क्यू करने के लिए गृह विभाग और डायल-112 से जुड़ी 1098 हेल्पलाइन।

कटनी/भोपाल (30 मई)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में मध्यप्रदेश ने महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में संवेदनशीलता और सुशासन (Governance) का एक नया प्रतिमान स्थापित किया है। राज्य सरकार के अंतर्गत ‘मिशन वात्सल्य’ योजना के तहत संचालित ‘चाइल्ड हेल्पलाइन-1098’ प्रदेश के संकटग्रस्त, शोषित और बेसहारा बच्चों के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनकर उभरी है।

Child Helpline 1098: एमपी में संकटग्रस्त बच्चों का सुरक्षा कवच बनी चाइल्ड हेल्पलाइन, एक साल में 30 हजार से अधिक मासूमों को मिला नया जीवन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कड़े निर्देशों के बाद अब यह हेल्पलाइन 24 घंटे (24×7) पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। यह टीम प्रदेश में हजारों मासूमों को हिंसा, बाल श्रम (Child Labour) और मानव तस्करी (Human Trafficking) के चंगुल से छुड़ाकर उनका पुनर्वास सुनिश्चित कर रही है।

सफलता के आंकड़े: सिर्फ 15 दिनों में 4 हजार से ज्यादा बच्चों की मदद

हेल्पलाइन के रिस्पॉन्स टाइम और काम करने के तरीके में कितना अभूतपूर्व सुधार आया है, इसे इन विभागीय आंकड़ों से आसानी से समझा जा सकता है:

  • वित्तीय वर्ष 2025-26 का रिकॉर्ड: पिछले वित्तीय वर्ष में इस हेल्पलाइन के जरिए रिकॉर्ड 30,810 संकटग्रस्त बच्चों तक त्वरित सहायता पहुंचाई गई।

  • मौजूदा वित्तीय वर्ष (2026-27): चालू वित्तीय वर्ष में महज 15 मई तक ही 4,376 बच्चों को रेस्क्यू कर मदद पहुंचाई जा चुकी है।

  • त्वरित निराकरण: इनमें से 2,367 मामलों का पूरी तरह से निपटारा कर दिया गया है, जबकि बाकी मामलों में जिला स्तर पर फॉलो-अप जारी है।

 मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति: आपात स्थिति में सीधे पुलिस एक्शन

‘मिशन वात्सल्य’ के तहत अब इस हेल्पलाइन को पूरी तरह हाईटेक और आधुनिक रिस्पॉन्स सिस्टम से लैस किया गया है। इसके तहत कॉल्स को दो श्रेणियों में बांटा जाता है:

  1. आपातकालीन मामले (Emergency): यदि कोई बच्चा किसी गंभीर या तत्काल खतरे में है, तो मामले को तुरंत ‘रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम’ (RSS-112) को ट्रांसफर किया जाता है, जिससे गृह विभाग और पुलिस की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है।

  2. गैर-आपातकालीन मामले: सामान्य मामलों को संबंधित जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) को भेजा जाता है, जो बच्चों की काउंसलिंग और कानूनी मदद सुनिश्चित करती है।

 इन बड़े शहरों में रहा सबसे ज्यादा असर

विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और सतना जैसे बड़े जिलों में चाइल्ड हेल्पलाइन का नेटवर्क सबसे ज्यादा एक्टिव रहा है। यहाँ सबसे ज्यादा बच्चों को बंधुआ मजदूरी, बाल विवाह और शोषण से मुक्त कराकर उनके परिवारों से दोबारा मिलाया गया है।

 सरकार की जनता से अपील: “मूकदर्शक न बनें, 1098 पर कॉल करें”

महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रदेश के सभी जागरूक नागरिकों, युवाओं और प्रबुद्ध वर्ग से अपील की है कि वे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं।

जरूरी संदेश: यदि आपको अपने आसपास, मोहल्ले या किसी दुकान पर कोई बच्चा संकट में, बाल विवाह का शिकार, बाल श्रम करता हुआ या किसी भी प्रकार के शोषण से पीड़ित दिखाई दे, तो मूकदर्शक न बनें। तुरंत टोल-फ्री नंबर ‘चाइल्ड हेल्पलाइन-1098’ पर सूचना दें। आपकी एक कॉल किसी मासूम का भविष्य संवार सकती है। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है।

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