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MP Land Registry: जमीन खरीदारों की बल्ले-बल्ले-रजिस्ट्री के बाद अब नहीं काटने पड़ेंगे पटवारी के चक्कर; कटनी कलेक्टर ने लागू किया यह ‘सुपरफास्ट’ डिजिटल सिस्टम

MP Land Registry: जमीन खरीदारों की बल्ले-बल्ले-रजिस्ट्री के बाद अब नहीं काटने पड़ेंगे पटवारी के चक्कर; कटनी कलेक्टर ने लागू किया यह 'सुपरफास्ट' डिजिटल सिस्टम

कटनी: मध्य प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और नागरिक सुविधाओं को हाईटेक बनाने की दिशा में राजस्व विभाग को बड़ी सफलता मिली है। कटनी कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के नेतृत्व में जिले भर में लागू की गई “साइबर तहसील 2.0” व्यवस्था जमीन के नामांतरण (Mutation) की प्रक्रिया के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है। इस नई पारदर्शी और केंद्रीकृत डिजिटल प्रणाली ने जमीन की रजिस्ट्री के बाद होने वाले नामांतरण के चक्करों से जनता को पूरी तरह मुक्ति दिला दी है।

MP Land Registry: जमीन खरीदारों की बल्ले-बल्ले-रजिस्ट्री के बाद अब नहीं काटने पड़ेंगे पटवारी के चक्कर; कटनी कलेक्टर ने लागू किया यह ‘सुपरफास्ट’ डिजिटल सिस्टम

इस हाईटेक व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि जिस नामांतरण प्रक्रिया के लिए पहले नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे और लगभग 70 दिन का समय लगता था, वह जटिल काम अब मात्र 20 से 25 दिनों में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पूरा हो रहा है।

जिले में 9,654 ऑनलाइन प्रकरणों का हुआ त्वरित निराकरण

साइबर तहसील 2.0 के जरिए जिले की सभी तहसीलों में पेंडिंग पड़े हजारों मामलों को तेजी से निपटाया गया है। तकनीक के इस्तेमाल से जनता के समय, श्रम और धन की भारी बचत हो रही है।

तहसीलवार निराकृत मामलों का पूरा आंकड़ा:

क्रमांक तहसील का नाम निराकृत ऑनलाइन प्रकरण
1. रीठी 1,284
2. विजयराघवगढ़ 1,253
3. कटनी नगर 1,116
4. बहोरीबंद 1,082
5. कटनी (ग्रामीण) 1,063
6. बड़वारा 1,031
7. स्लीमनाबाद 1,018
8. ढीमरखेड़ा 957
9. बरही 850
कुल संपूर्ण कटनी जिला 9,654 प्रकरण

‘साइबर तहसील 1.0’ से ‘2.0’ का सफर: अब आंशिक खसरे का भी तुरंत निपटारा

राज्य सरकार ने भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण के लिए सबसे पहले “साइबर तहसील 1.0” की शुरुआत की थी।

  • साइबर तहसील 1.0: इसके तहत केवल ‘पूर्ण खसरा’ (पूरी की पूरी जमीन बेचने या ट्रांसफर करने) से जुड़े नामांतरण मामलों को ही ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर के जरिए डिजिटल किया जाता था।

  • साइबर तहसील 2.0 (नया अपडेट): इसकी अपार सफलता को देखते हुए सरकार ने इसका दायरा बढ़ाकर ‘2.0’ वर्जन लॉन्च किया। अब इसके अंतर्गत ‘आंशिक खसरा’ (अर्थात किसी बड़े भूखंड या जमीन के एक छोटे से टुकड़े की बिक्री) से जुड़े मामलों को भी पूरी तरह ऑनलाइन और डिजिटल कर दिया गया है।

 तकनीकी रूप से जटिल ‘आंशिक खसरा’ की राह हुई आसान

राजस्व विभाग में आंशिक खसरे से जुड़े मामलों को सबसे ज्यादा पेचीदा माना जाता है, क्योंकि इसमें पूरी जमीन में से बेचे गए हिस्से का सटीक सीमांकन करना, रिकॉर्ड में तरमीम (संशोधन) करना और चौहद्दी का मिलान करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता था। मैन्युअल व्यवस्था में इसी वजह से सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार और लेती-देती की शिकायतें आती थीं।

“साइबर तहसील 2.0” ने इस पूरी चुनौती को अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम से हल कर दिया है। अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक होती है, जिससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि भविष्य में होने वाले भूमि संबंधी आपसी विवादों की गुंजाइश भी पूरी तरह खत्म हो गई है।

 साइबर तहसील 2.0: मुख्य बदलाव

मापदंड पुरानी व्यवस्था (मैन्युअल) नई व्यवस्था (साइबर तहसील 2.0)
लगाना वाला समय औसतन 70 दिन मात्र 20 से 25 दिन
कार्यालय के चक्कर पटवारी और तहसील के बार-बार चक्कर 100% ऑनलाइन (घर बैठे ट्रैकिंग)
मैन्युअल हस्तक्षेप अत्यधिक (विवाद और देरी की संभावना) न्यूनतम (सॉफ्टवेयर आधारित पारदर्शिता)
दायरा सिर्फ पूर्ण खसरा प्रकरण पूर्ण एवं आंशिक (टुकड़े) खसरा दोनों शामिल

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