‘अंतिम सांस तक अयोध्या में रहूंगा’-पद से इस्तीफे के बाद बोले चंपत राय, परमहंस आचार्य ने बताया ‘युग ऋषि’
विवाद के 2 महीने बाद सार्वजनिक रूप से दिखे चंपत राय-परमहंस आचार्य से बंद कमरे में 30 मिनट चर्चा, बोले- 'अंतिम सांस तक अयोध्या नहीं छोडूंगा'
'अंतिम सांस तक अयोध्या में रहूंगा'-पद से इस्तीफे के बाद बोले चंपत राय, परमहंस आचार्य ने बताया 'युग ऋषि'
‘अंतिम सांस तक अयोध्या में रहूंगा’-पद से इस्तीफे के बाद बोले चंपत राय, परमहंस आचार्य ने बताया ‘युग ऋषि’
अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी और गबन विवाद के सामने आने के लगभग दो महीने बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय मंगलवार को पहली बार मंदिर परिसर/भवन से बाहर सार्वजनिक रूप से नजर आए.
चातुर्मास के अवसर पर अयोध्या के संत-धर्माचार्यों से भेंट करने के क्रम में चंपत राय तपस्वी छावनी पहुंचे. वहां उन्होंने तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य से बंद कमरे में करीब 30 मिनट तक गहन चर्चा की.
परमहंस आचार्य ने बताया ‘युग ऋषि’, चंपत राय ने दिया अयोध्या में रहने का आश्वासन
मुलाकात के बाद जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने मीडिया से बातचीत में चंपत राय की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा:
“चंपत राय युग ऋषि हैं. उनके नेतृत्व में राम मंदिर का जितना भव्य निर्माण हुआ है, उसकी हम लोगों ने केवल कल्पना की थी.”
परमहंस आचार्य ने आगे बताया कि उन्होंने चंपत राय से अपील की है कि वे अयोध्या छोड़कर कहीं न जाएं. इस पर चंपत राय ने उन्हें पूर्ण आश्वस्त किया कि वे अपनी अंतिम सांस तक अयोध्या छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे.
चढ़ावा चोरी विवाद के बाद पहली बड़ी मौजूदगी
उल्लेखनीय है कि जून के पहले सप्ताह में राम मंदिर के दान/चढ़ावे में हेराफेरी और चोरी का मामला उजागर होने के बाद से चंपत राय तीर्थ क्षेत्र भवन (मंदिर परिसर से 200 मीटर दूर स्थित इमारत) तक ही सीमित थे.
इस बहुचर्चित विवाद के बाद उत्पन्न परिस्थितियों और विपक्ष के हमलावर रुख के बीच चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था. चंपत राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है और अपने करीबियों से कहा है कि वे एसआईटी (SIT) की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस विषय पर सार्वजनिक बयान देंगे.
क्या है राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला? (Timeline)
जून की शुरुआत: राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान की राशि में चोरी/गबन का मामला पहली बार सामने आया.
संसद से सड़क तक हंगामा: इस मुद्दे को विपक्षी दलों ने संसद और उत्तर प्रदेश विधानसभा में जोर-शोर से उठाया.
SIT जांच व FIR (25 जून): मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर यूपी सरकार ने SIT का गठन किया. अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज हुई.
8 आरोपी जेल में: दान की गिनती में हेराफेरी और साजिश रचने के आरोप में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है.