ओरछा में सजेगा भाजपा का ‘चुनावी चक्रव्यूह’: नवगठित प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक जुलाई के मध्य में; हेमंत खंडेलवाल की नई टीम को मिलेंगी बड़ी जिम्मेदारियां

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ओरछा में सजेगा भाजपा का ‘चुनावी चक्रव्यूह’: नवगठित प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक जुलाई के मध्य में; हेमंत खंडेलवाल की नई टीम को मिलेंगी बड़ी जिम्मेदारियां

भोपाल। मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नवनियुक्त प्रदेश कार्यसमिति की पहली भव्य और रणनीतिक बैठक धार्मिक नगरी ओरछा में आयोजित होने जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की कमान में बनी इस नई और ऊर्जावान टीम की यह पहली औपचारिक बैठक होगी, जिसके 15 जुलाई के बाद आयोजित होने की प्रबल संभावना है।

इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी महीनों के लिए पार्टी का संगठनात्मक खाका तैयार करना और जमीनी स्तर पर विपक्ष के खिलाफ अधिक आक्रामक रणनीति बनाना है।

हर विधानसभा क्षेत्र के लिए तय होगी विशेष ‘कमांड’

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में संगठन को और अधिक धारदार व जमीनी रूप से मजबूत बनाने के लिए बेहद कड़े फैसले लिए जा सकते हैं:

  • विधानसभा क्षेत्रवार जिम्मेदारियां: कार्यसमिति के सदस्यों को केवल कागजी पद नहीं, बल्कि सीधे तौर पर विधानसभा क्षेत्रों का जिम्मा (प्रभार) सौंपा जा सकता है ताकि हर इलाके में पार्टी की पकड़ अभेद्य बनी रहे।

  • चुनावी चुनौतियों पर मंथन: आगामी स्थानीय और क्षेत्रीय राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए सभी 106 मुख्य सदस्यों को सीधे मैदान में उतरने के निर्देश दिए जाएंगे।

दिग्गज चेहरों से सजी 106 सदस्यीय नई कार्यसमिति

हाल ही में घोषित हुई इस नई कार्यसमिति में क्षेत्रीय, सामाजिक और महिला प्रतिनिधित्व (33% आरक्षण के साथ) का विशेष ध्यान रखा गया है। इस सुपर-टीम में मध्य प्रदेश और देश की राजनीति के कई महाध्यायी शामिल हैं:

प्रमुख नेतापद/स्थान (संगठन में भूमिका)
हेमंत खंडेलवालप्रदेश अध्यक्ष (नेतृत्वकर्ता)
डॉ. मोहन यादवमुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश
शिवराज सिंह चौहानकेंद्रीय मंत्री (मुख्य मार्गदर्शक)
ज्योतिरादित्य सिंधियाकेंद्रीय मंत्री (सिंधिया समर्थकों का भी मजबूत दबदबा)

ओरछा ही क्यों चुना गया?

बुंदेलखंड की पावन धरा ओरछा को चुनकर भाजपा न केवल एक मजबूत सांस्कृतिक-धार्मिक संदेश देना चाहती है, बल्कि बुंदेलखंड के राजनीतिक समीकरणों को भी और मजबूत करना चाहती है। पार्टी नेताओं के अनुसार, 15 जुलाई के बाद की किसी भी तारीख पर इस ‘महा-मंथन’ की अंतिम मुहर लग जाएगी, जिसके बाद प्रदेश भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में नजर आएगी।