भाजपा ऑब्जर्वर पहुंचे कटनी, दिखी चापलूसी से चांस मारने वाले नेताओं की सक्रियता

कटनी। भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय में बीते कुछ दिनों से अचानक निष्क्रिय कार्यकर्ता भी सक्रिय होकर निष्ठा का राग अलापने लगे हैं। हर वक्त संगठन को भला बुरा कहने वालों की जुबान से अचानक शहद टपकने लगी लेकिन यह सब किसी निष्ठा के कारण नहीं बल्कि उस संभावनाओं की खातिर हुआ है जिसमे जिला कार्यकारिणी में स्थान से लेकर शासकीय समितियों, एल्डरमैन जैसे पदों पर नियुक्ति की उम्मीद है। चांस मारने वाले ऐसे नेता आज भी अपनी आदत के अनुसार चापलूसी से चांस की कोशिश में जुटे नजर आए हालांकि ऐसे तथाकतिथ निष्ठावान कार्यकर्ताओं को संगठन भली भांति जानता है।
भाजपा आब्जर्वर पहुंचे, की चर्चा
दरअसल आज जिला भाजपा कार्यालय में सुबह से ही संगठनात्मक गतिविधियों के तहत पर्यवेक्षकों के आगमन की खबर के बाद गहमा गहमी थी। आपको बता दें कि कटनी सहित 62 जिलों में भाजपा की संगठनात्मक नियुक्ति जिला कार्यकारिणी सहित अन्य पदों के लिए नाम तय करने हेतु संगठन ने आब्जर्वर नियुक्त किये हैं।
कटनी के लिए रमेश भटेरे तथा सुजीत जैन को आब्जर्वर बनाया गया यह दोनों ही नेता आज कटनी पहुंचे थे। श्री भटेरे तथा श्री जैन ने आज कटनी में जिलाध्यक्ष दीपक टण्डन, जिला प्रभारी संजय साहू, प्रमुख पदाधिकारी एवं विधायकों संजय पाठक, संदीप जायसवाल, प्रणय पांडे धीरेंद्र सिंह, से चर्चा की। जिला संगठन और सरकार में राजनीतिक नियुक्तियों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने यह नई व्यवस्था बनाई है जिसमे संगठन में नियुक्तियों के लिए जनप्रतिनिधियों से राय ली जाएगी।
नियुक्तियों में चांस मारने सक्रिय
खैर यह तो संगठन की सामान्य प्रक्रिया थी पर कुछ भाजपाई संगठन और सरकारी नियुक्तियों में चांस मारने सुबह से ही भाजपा कार्यालय के बाहर मंडराने लगे थे। कोई इधर उधर से जुगत भिड़ाने में लगा था जबकि सभी जानते हैं बीजेपी संगठन में चांस का कोई रोल नहीं, यहां हर कार्यकर्ता का उसके कार्य के मुताबिक आंकलन होता रहता है। जब नेतृत्व को ठीक लगता है उसे दायित्व भी मिल जाता है ।
जमकर घूमे प्रवासी भाजपाई
मजेदार बात यह है कि जिला भाजपा कार्यालय में आज इस संगठनात्मक प्रक्रिया में उन प्रवासी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ज्यादा थी जो सिर्फ पद ढूंढते रहते हैं। कार्यकर्ता के रूप में बतौर दायित्व इनके लिए काम करना कठिन होता है। मंच पर बैठने की जुगत या फिर फोटो में दिखना ही इनकी कार्य की पद्धति होती है। किसी वरिष्ठ के साथ होकर दो चार दिन खूब सक्रियता दिखाते हैं । ऐसे नेता आज जिला कार्यालय की हर पल की खबर लेते दिखे। कुछ तो ऐसे थे जो दूर शहर गांव में बैठ कर भी कॉमेंट्री कर करने के लिए सक्रिय नजर आ रहे थे। जबकि कुछ स्वयं को खबरिया बताने फोन से कर्तव्य निभा रहे थे। अब देखना यह है कि चापलूसी से चांस तक वाले नेताओं की खिचड़ी पक पाती है या फिर वह संगठन अथवा बड़े नेतृत्व को कोसने के कार्य मे लग जाते हैं, भविष्य बताएगा।








