Bijli : आगरा का अंडरग्राउंड बिजली माडल दिलाएगा बिजली कटौती और चोरी से निजात
भोपाल । प्रदेश की बिजली कंपनियां बिजली कटौती और चोरी से परेशान है। खरीदी गई बिजली का काफी बड़ा हिस्सा हर साल चोरी हो जाता है। इसका सीधा नुकसान कंपनी और सरकार को उठाना पड़ रहा है। तारों में जो आपूर्ति दी जाती है वह बेमौसम बारिश, तूफान और अन्य कारणों से बाधित होता है। उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ता है। कंपनी पर कटौती के दाग लगते हैं। कई बार तो सरकार को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। इन सभी समस्याओं को खत्म करने के लिए उत्तरप्रदेश के आगरा की तर्ज पर भोपाल शहर में अंडरग्राउंड बिजली व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है। आगरा शहर में बिजली तार अंडर ग्राउंड है जिसके कारण बिजली बिना रूकावट के चालू रहती है। चोरी भी नही होती है। इस व्यवस्था का मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बीते दिनों अध्ययन कराया है जो पसंद आ गया है। यह व्यवस्था पहले चरण में भोपाल शहर में लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
शहर में अंडरग्राउंड बिजली व्यवस्था के लिए तैयार कराई जा रही डीपीआर
भोपाल शहर में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को अंडर ग्राउंड करने के लिए प्रोजेक्ट डिटेल रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कराई जा रही है। यह डीपीआर रिवेम्ड रिफार्म बेस्ड रिजल्ट लिंक डिस्ट्रीब्यूशन योजना के तहत तैयार कराई जा रही है। आने वाले समय में इस माडल के तहत शहर में बिजली व्यवस्था को अंडरग्राउंड किया जाएगा। इसके लिए अलग से बजट का इंतजाम होगा।
4.50 लाख उपभोक्ताओं को फायदा
भोपाल शहर में इस व्यवस्था के लागू होने से 4.50 लाख उपभोक्ताओं को फायदा होगा। इनमें सबसे बड़ा तबका सामान्य व घरेलू उपभोक्ताओं का है जिन्हें सामूहिक व्यवस्था के तहत आपूर्ति दी जा रही है। कुछ उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके लिए अलग से ट्रांसफार्मर व फीडर है जिन्हें सामान्य उपभोक्ता की तुलना में कम परेशान होना पड़ता है।
बड़े खर्चे का काम
बिजली कंपनी के जानकारों का कहना है कि यह काफी बड़े खर्चे का काम है क्योंकि वर्तमान में मौजूदा व्यवस्था के तहत जमीन के उपर तार, बिजली के पोल, स्टेशन है। इनमें से कुछ तार तो अभी भी खुले हुए हैं। अंडरग्राउंड माडल के तहत यह सभी व्यवस्था भूमिगत की जाएगी। इसमें बड़ा खर्च आएगा। सरकार के बिना सहयोग के कंपनियां कुछ नहीं कर सकेगी।
निजी हाथों में जा सकती है योजना
बिजली कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि इतना बड़ा खर्च उठाने के लिए कंपनी और सरकार के पास बजट नहीं है। ऐसे में यह योजना निजी हाथों में दी जाएगी। जिसके बदले निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से बिल की राशि लेकर अपना खर्च निकालेगी।








