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एमपी सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी की ‘तबादला नीति 2026’, जानें बड़े बदलाव और नियम

एमपी सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी की ‘तबादला नीति 2026’, जानें बड़े बदलाव और नियम

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य और जिला स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ‘स्थानांतरण नीति-2026’ (Transfer Policy 2026) की घोषणा कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी इस नीति के तहत सूबे में तबादलों का दौर 01 जून 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा。 इस तय समय सीमा के बाद सामान्य तबादलों पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।

​आइए जानते हैं इस नई तबादला नीति की मुख्य बातें और कौन से कर्मचारी इसके दायरे में आएंगे:

​इन सेवाओं पर लागू नहीं होगी यह नीति

​यह नई स्थानांतरण नीति मध्यप्रदेश संवर्ग के अखिल भारतीय सेवाओं (IAS/IPS/IFS), न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS), राज्य पुलिस सेवा (SPS), राज्य वन सेवा और मंत्रालय सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा, जिन विभागों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए अलग नीति चाहिए, वे GAD के परामर्श और समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन से अपनी अलग नीति बना सकेंगे।

किसके पास होगी तबादले की कमान?

  • ​जिले के भीतर (तृतीय व चतुर्थ श्रेणी): जिला कलेक्टर के माध्यम से जिले के प्रभारी मंत्री के अनुमोदन के बाद विभागीय जिला अधिकारी के हस्ताक्षर से आदेश जारी होंगे।
  • ​प्रथम श्रेणी (विभागाध्यक्ष व CEO): शासकीय उपक्रमों और संस्थाओं में पदस्थ प्रथम श्रेणी के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद ही प्रशासकीय विभाग द्वारा किए जाएंगे।
  • ​शेष प्रथम, द्वितीय व तृतीय श्रेणी (राज्य संवर्ग): जिले के बाहर के तबादले विभागीय भारसाधक मंत्री के अनुमोदन से प्रशासकीय विभाग द्वारा जारी होंगे।
  • ​चतुर्थ श्रेणी (राज्य संवर्ग): विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद विभागाध्यक्ष द्वारा।
  • ​पुलिस विभाग: उप पुलिस अधीक्षक (DSP) से कनिष्ठ कर्मचारियों के लिए पुलिस स्थापना बोर्ड निर्णय लेगा, और जिले के भीतर प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से SP पदस्थापना करेंगे। DSP और उनसे वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री के अंतिम अनुमोदन से होंगे।

 प्रतिबंध अवधि (15 जून के बाद) में सिर्फ इन शर्तों पर होंगे तबादले

​15 जून 2026 के बाद सामान्य तबादले बंद हो जाएंगे। इसके बाद केवल विशेष परिस्थितियों में ही विभागीय मंत्री की मंजूरी से तबादले हो सकेंगे:

  • ​कैंसर, लकवा, हृदयाघात जैसी गंभीर बीमारियों के आधार पर।
  • ​कोर्ट के ऐसे आदेश जिनके पालन के अलावा कोई कानूनी विकल्प न हो।
  • ​गंभीर लापरवाही, शिकायत या वित्तीय अनियमितता के मामलों में चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई या लोकायुक्त/EOW में दर्ज आपराधिक मामलों के कारण।
  • ​निलंबन, सेवानिवृत्ति, पदोन्नति या निधन से खाली हुए पदों को लोकहित में भरना जरूरी होने पर। हालांकि, खाली पदों को भरने के लिए श्रृंखला (Chain) बनाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।

कैडर वार तबादलों की अधिकतम सीमा (प्रतिशत)

​सालभर में प्रशासनिक और स्वैच्छिक दोनों तबादलों को मिलाकर कुल पदों के आधार पर एक सीमा तय की गई है:

  • ​200 तक पद संख्या वाले कैडर में: अधिकतम 20%।
  • ​201 से 1000 तक पद संख्या वाले कैडर में: 40 + [(कुल पद – 200) का 15%]।
  • ​1001 से 2000 तक पद संख्या वाले कैडर में: 160 + [(कुल पद – 1000) का 10%]।
  • ​2001 से अधिक पद संख्या वाले कैडर में: 260 + [(कुल पद – 2000) का 5%]।

 दिव्यांग, गंभीर बीमार और कम लिंगानुपात वाले जिलों के लिए विशेष प्रावधान

  • ​गंभीर बीमारी व दिव्यांगता: 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारियों का सामान्यतः तबादला नहीं होगा। हालांकि, स्वयं के व्यय पर स्वैच्छिक आवेदन देने पर विचार किया जा सकता है। इसी प्रकार कैंसर, डायलिसिस या ओपन हार्ट सर्जरी से पीड़ित कर्मचारियों को जिला मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर प्राथमिकता मिलेगी।
  • ​कम लिंगानुपात वाले जिले: वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जिन 9 जिलों का लिंगानुपात 900 से कम है (जैसे- मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, छतरपुर, सागर, विदिशा और रायसेन), वहां उच्च प्रशासनिक पदों पर यथासंभव महिला अधिकारियों को पदस्थ किया जाएगा।
  • ​गृह जिला नियम: कार्यपालिक कर्मचारियों को सामान्यतः उनके गृह जिले में पदस्थ नहीं किया जाएगा, लेकिन अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा या परित्यक्ता महिलाओं को इसमें छूट दी जाएगी।

 ऑनलाइन ट्रांसफर और ‘नो-रिलीवर’ सख्त नियम

  • ​डिजिटल ट्रांसफर (e-Office): सभी स्थानांतरण आदेश ऑनलाइन अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव या विभागाध्यक्ष के ई-ऑफिस (e-Office) के माध्यम से ही किए जाएंगे। यदि कोई आदेश 15 जून 2026 के बाद ई-ऑफिस में जारी पाया जाता है, तो वह स्वतः ही शून्य (Suo Moto Null) माना जाएगा और उसका पालन नहीं होगा।
  • ​2 सप्ताह में कार्यमुक्ति: आदेश जारी होने के दो सप्ताह के भीतर कर्मचारी को कार्यमुक्त होना अनिवार्य होगा। ऐसा न होने पर उसे एकतरफा कार्यमुक्त (One-sided Relieve) कर दिया जाएगा और पुराने स्थान से उसका वेतन आहरण तत्काल बंद हो जाएगा।
  • ​अनुसूचित क्षेत्र: आदिवासी या अनुसूचित क्षेत्रों में तबादले से खाली हुए पदों को पहले भरा जाएगा। अनुसूचित क्षेत्र से गैर-अनुसूचित क्षेत्र में ट्रांसफर होने वाले कर्मचारियों को तब तक रिलीव नहीं किया जाएगा, जब तक उनका रिप्लेसमेंट (Reliever) वहां आकर कार्यभार ग्रहण न कर ले।

 कर्मचारी संगठनों को छूट

​राज्य शासन से मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के प्रदेश/संभाग/जिला/तहसील/विकासखंड शाखा के चुनिंदा पदाधिकारियों (अध्यक्ष/सचिव/कोषाध्यक्ष) को पद पर नियुक्ति के बाद दो पदावधि यानी अधिकतम 4 वर्ष तक तबादले से सामान्यतः छूट मिलेगी। बशर्ते उनकी सूची निर्धारित समय-सीमा (30 अप्रैल) तक कलेक्टर और संबंधित विभाग को सौंप दी गई हो।

​आदेश की प्रति: यह नीति राज्यपाल के नाम से सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव सचिन राव द्वारा हस्ताक्षरित कर सभी विभागों, कलेक्टर्स और कमिश्नर्स को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दी गई है।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि