रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण को बड़ा बढ़ावा: भारत सरकार ने एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स के नियमों में किया अहम बदलाव
डॉलर ढेर, रुपया शेर, कच्चे तेल की गिरावट से करेंसी मार्केट में बड़ा 'खेला'
रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण को बड़ा बढ़ावा: भारत सरकार ने एक्सपोर्ट इंसेंटिव्स के नियमों में किया अहम बदलाव
नई दिल्ली: भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भारतीय रुपये (INR) के इस्तेमाल को गति देने के लिए एक बड़ी नियामक बाधा को दूर कर दिया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने फॉरेन ट्रेड पॉलिसी (FTP) 2023 में संशोधन कर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय रुपये में भुगतान लेने वाले भारतीय निर्यातक (Exporters) भी अब सभी सरकारी इंसेंटिव्स और फायदों के पूरी तरह हकदार होंगे।
क्या बदला नए नियम में?
डॉलर की बाध्यता खत्म: अब ACU (एशियन क्लियरिंग यूनियन) से बाहर के देशों के साथ व्यापार में एक्सपोर्टर्स रुपये या विदेशी मुद्रा किसी में भी इनवॉइस जारी कर सकते हैं।
सरकारी इंसेंटिव्स का फायदा: नेपाल और भूटान को छोड़कर अन्य देशों से मंजूर बैंकिंग चैनलों के जरिए रुपये में आया भुगतान अब विदेशी मुद्रा (जैसे डॉलर) की तरह ही FTP की शर्तों को पूरा करने योग्य माना जाएगा।
अनिश्चितता का अंत: RBI ने जुलाई 2022 में ‘स्पेशल रुपया वोस्ट्रो अकाउंट्स’ (SRVA) की शुरुआत की थी, लेकिन FTP में स्पष्टता न होने से एक्सपोर्टर्स इंसेंटिव्स को लेकर आशंकित थे, जिसे इस संशोधन ने पूरी तरह दूर कर दिया है।
क्यों अहम है यह फैसला?
करंसी कन्वर्जन कॉस्ट में कमी: हर ट्रांजैक्शन को US डॉलर में करने के बजाय रुपये में सेटलमेंट करने से करेंसी एक्सचेंज का खर्च बचेगा।
फॉरेक्स रिजर्व की कम जरूरत: तेल निर्यातक देशों के साथ रुपये में सेटलमेंट से करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) में सुधार होगा और भारी-भरकम विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखने का दबाव कम होगा।
डॉलर की कमी वाले देशों से व्यापार आसान: यह कदम ऐसे देशों के साथ व्यापार में राहत देगा जहाँ डॉलर की किल्लत है या पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण अंतर्राष्ट्रीय पेमेंट सिस्टम तक पहुंच मुश्किल है।