Bhopal MANIT Food Poisoning: हॉस्टल मेस के पानी में मिले ‘काले कण’, 80 से ज्यादा छात्र बीमार, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

Bhopal MANIT Food Poisoning: हॉस्टल मेस के पानी में मिले 'काले कण', 80 से ज्यादा छात्र बीमार, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

Bhopal MANIT Food Poisoning: हॉस्टल मेस के पानी में मिले ‘काले कण’, 80 से ज्यादा छात्र बीमार, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

भोपाल: मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट – MANIT) भोपाल के छात्रावासों (Hostels) से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ के हॉस्टलों में रह रहे 80 से अधिक छात्र उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) का शिकार होकर बीमार पड़ गए हैं। मीडिया में इस अव्यवस्था के प्रमुखता से उठने के बाद प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में बड़ी कार्रवाई की गई है।

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के सख्त निर्देश पर शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने मैनिट के हॉस्टल नंबर 9 और 11 की मेस में औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया, जहाँ सेहत से खिलवाड़ की रोंगटे खड़े कर देने वाली हकीकत सामने आई।

बिना लाइसेंस चल रही थी मेस, स्वच्छता की उड़ीं धज्जियां

जांच टीम जब हॉस्टल की मेस में पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित गंभीर लापरवाहियां पाई गईं:

 दावों की खुली पोल: RO सिस्टम में गंदगी और पानी में मिले ‘काले कण’

संस्थान प्रबंधन छात्रों की सेहत को लेकर कितना लापरवाह था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निरीक्षण के दौरान पानी का फिल्टर पूरी तरह फेल पाया गया:

झूठा साबित हुआ प्रबंधन का दावा: संस्थान प्रबंधन ने यह दावा किया था कि 11 जुलाई को ही पानी की टंकियों की सफाई कराई गई थी और आरओ (RO) फिल्टर भी बदले गए थे। लेकिन जब खाद्य सुरक्षा टीम ने आरओ प्लांट और जल भंडारण टंकियों की गहन जांच की, तो स्थिति बिल्कुल उलट मिली।

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पानी में मिले सूक्ष्म काले कण: जांच में आरओ सिस्टम के भीतर भयानक गंदगी पाई गई और सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि छात्रों को पिलाए जा रहे पानी में सूक्ष्म काले कण तैरते हुए मिले। इसने पेयजल की गुणवत्ता और छात्रों की सुरक्षा पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन ने इस मामले में मेस संचालकों और संस्थान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और आगे की दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

— भोपाल ब्यूरो, विशेष रिपोर्ट

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