Asian Games 2026: 22 महीने के बैन और कड़े संघर्ष के बाद रिंग में वापसी-रोहतक की बेटी परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स में जीता गोल्ड, ताइपे की बॉक्सर को 3-2 से हराया
नई दिल्ली: जापान में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 में हरियाणा के रोहतक की रहने वाली स्टार मुक्केबाज परवीन हुड्डा (Parveen Hooda) ने इतिहास रच दिया है। महिलाओं के 65 किलोग्राम भारवर्ग के रोमांचक फाइनल मुकाबले में परवीन ने चीनी ताइपे (Chinese Taipei) की मजबूत बॉक्सर को 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से मात देकर भारत की झोली में एक और स्वर्णिम सफलता डाली।
यह जीत परवीन के लिए केवल एक पदक नहीं, बल्कि उनके जीवन की सबसे बड़ी और भावनात्मक वापसी का प्रतीक है।
रोमांचक फाइनल: तीसरे राउंड में मुक्कों की बौछार से हासिल किया गोल्ड
गोल्ड मेडल मुकाबला बेहद सांस रोक देने वाला रहा:
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पहला राउंड: परवीन ने शुरुआती राउंड में ही अपनी आक्रामक रणनीति से 5-0 का एकतरफा दबदबा बनाया।
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दूसरा राउंड: चीनी ताइपे की मुक्केबाज ने दूसरे राउंड में वापसी करते हुए अंक जुटाए, जिससे मुकाबला बराबरी पर आ खड़ा हुआ।
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तीसरा और निर्णायक राउंड: तनावपूर्ण मोड़ पर परवीन ने धैर्य बनाए रखा और विरोधी बॉक्सर पर मुक्कों की बौछार कर दी। जजों ने 3-2 से फैसला परवीन के पक्ष में दिया और भारत ने एशियन गेम्स में एक और गोल्ड पर कब्जा कर लिया।
बैन का दर्द, डिप्रेशन और फिर चैंपियन बनने का सफर
परवीन हुड्डा के लिए यह गोल्ड मेडल किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है:
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खो दिया था ब्रॉन्ज मेडल व ओलंपिक कोटा: साल 2023-24 में डोपिंग वेयरअबाउट्स (लोकेशन न बताने) के नियम उल्लंघन के कारण उन पर 22 महीने का लंबा बैन लगा दिया गया था। उनसे हांगझोऊ एशियन गेम्स का ब्रॉन्ज मेडल और पेरिस ओलंपिक का कोटा तक छीन लिया गया था।
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मानसिक टूटन से वापसी: इस झटके के बाद परवीन गहरे सदमे और मानसिक तनाव में चली गई थीं। हालांकि, स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट (मनोवैज्ञानिक) की मदद, नियमित मेडिटेशन और कठिन परिश्रम के दम पर उन्होंने खुद को दोबारा खड़ा किया और रिंग में धमाकेदार वापसी की।
गरीबी और अभावों को पछाड़कर बनीं देश की शान
रोहतक के एक छोटे से गाँव में जन्मीं परवीन का बचपन बेहद गरीबी में बीता:
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बंजर जमीन और तंगहाली: परिवार के पास खेती की जमीन बंजर थी, जिससे आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। उनके पास शुरुआत में मुक्केबाजी के दस्ताने और जूते खरीदने तक के पैसे नहीं थे।
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कोच और मां का मिला सहारा: साल 2011 में गांव के सरपंच सुधीर हुड्डा ने बॉक्सिंग एकेडमी शुरू की। मैरी कॉम और विजेंदर सिंह से प्रेरित होकर परवीन ने बॉक्सिंग शुरू की, जहां कोच ने उन्हें जूते और दस्ताने मुहैया कराए। पिता शुरुआत में खेल के खिलाफ थे, लेकिन मां ने हमेशा अपनी बेटी का हौसला बढ़ाया।
आज वही तंगहाली में पली-बढ़ी रोहतक की बेटी पूरे देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर चुकी है।








