एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित होंगे भारतीय वायु सेना के नए वाइस चीफ; 1 जुलाई को संभालेंगे कमान, 3300+ घंटे उड़ान का कड़ा अनुभव
नई दिल्ली: भारतीय सैन्य विन्यास और वायु सेना के शीर्ष रणनीतिक कमान में एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा बदलाव हुआ है। देश के बेहतरीन फाइटर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायु सेना (IAF) का अगला वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ (Vice Chief of the Air Staff) नियुक्त किया गया है। रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक विन्यास के अनुसार, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित आगामी 1 जुलाई (2026) को अपना नया विधिक पद संभालेंगे।
खड़कवासला से नई दिल्ली तक: कड़ा शैक्षणिक व सैन्य विन्यास
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का वायु सेना में अब तक का सफर अद्वितीय और बेहद कड़क रहा है:
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कमीशन और स्ट्रीम: उन्हें 6 दिसंबर, 1986 को भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठित फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था।
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प्रतिष्ठित शैक्षणिक पृष्ठभूमि: वे देश के शीर्ष सैन्य संस्थानों के पूर्व छात्र रहे हैं, जिनमें नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), खड़कवासला, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (बांग्लादेश) और नेशनल डिफेंस कॉलेज (NDC), नई दिल्ली शामिल हैं।
मिराज, मिग और जगुआर: 3,300+ घंटों की कड़क उड़ान का अनुभव
एयर मार्शल दीक्षित केवल एक कुशल रणनीतिकार ही नहीं, बल्कि भारतीय आकाश के एक कड़े और मंझे हुए योद्धा हैं:
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बहुमुखी पायलट: वे एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं. उन्हें मिराज-2000, मिग-21 और जगुआर समेत 20 से भी अधिक विभिन्न प्रकार के लड़ाकू और सैन्य विमानों को उड़ाने का 3,300 घंटे से ज्यादा का कड़ा अनुभव प्राप्त है।
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कमांडिंग विन्यास: उन्होंने दक्षिणी सेक्टर में वायु सेना के एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाली। उनके अनुशासित नेतृत्व में उस बेस को पूरी कमांड का ‘सर्वश्रेष्ठ बेस’ (Best Base) चुना गया था।
स्वदेशी अपग्रेड और MMRCA फील्ड ट्रायल्स में अहम भूमिका
एक कुशल टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने वायु सेना की परिचालन क्षमता (Operational Capability) को बढ़ाने में कड़ा योगदान दिया है:
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टेस्ट पायलट के रूप में सेवा: उन्होंने ‘एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट’, बैंगलोर में बतौर टेस्ट पायलट अपनी कड़क सेवाएं दीं।
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स्वदेशी अपग्रेड प्रोग्राम: फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण स्वदेशी अपग्रेड्स का नेतृत्व किया, जिसमें जगुआर और मिग-27 विमानों के लिए एवियोनिक्स अपग्रेड (Avionics Upgrade) प्रोजेक्ट्स शामिल रहे।
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फ्रांस से मिराज की सुरक्षित फेरी: विंग कमांडर के पद पर रहते हुए उन्होंने 15 दिसंबर 2004 से 31 मार्च 2005 के बीच महज 500 घंटे की सफल उड़ान के भीतर फ्रांस से 10 नए मिराज-2000 विमानों की मंजूरी और उनकी सुरक्षित ‘फेरी’ का संचालन कर अपनी बेहतरीन लीडरशिप का लोहा मनवाया था। उन्होंने मिराज मिशन प्रिपरेशन सिस्टम (MIPSY) में सुधार कर ‘एक्सरसाइज गोल्डन ईगल’ को कड़ाई से सफल बनाया।
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MMRCA ट्रायल्स: एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स के डायरेक्टर और MMRCA प्रोजेक्ट के डायरेक्टर के रूप में उन्होंने 6 विदेशी फाइटर जेट्स के बेहद जटिल और कड़े फील्ड ट्रायल्स को रिकॉर्ड समय में पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित किया।
विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) के कड़े गौरव से सुसज्जित
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को उनकी असाधारण सैन्य सेवाओं, तकनीकी विशेषज्ञता और देश के प्रति कड़े समर्पण के लिए राष्ट्रपति द्वारा विशिष्ट सेवा मेडल (Vishisht Seva Medal – VSM) से भी सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान उन्हें मिराज-2000 स्क्वाड्रन को ‘बेस्ट’ बनाने और जगुआर व मिग-27 के स्वदेशी अपग्रेड्स को रिकॉर्ड समय में विधिक रूप से पूरा करने के लिए दिया गया था।
