मध्यप्रदेश

जूनियर डॉक्‍टरों ने हड़ताल वापस ली, शनिवार से लौटेंगे काम पर

भोपाल। स्टायपेंड (शिष्यवृत्ति) में 20 हजार रुपए की बढ़ोतरी की मांग को लेकर सोमवार से जारी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल शुक्रवार देर रात खत्म हो गई। जूनियर डॉक्टर शनिवार सुबह 8 बजे से काम पर लौट आएंगे। देर रात एक जूडा पदाधिकारियों के साथ बैठक में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया ने काम पर लौटने के बाद निष्कासित डॉक्टरों को वापस लेने का भरोसा दिया। इसके बाद जूडा ने हड़ताल खत्म कर दी।

सेंट्रल जूडा के प्रेसीडेंट डॉ. सचेत सक्सेना ने हड़ताल खत्म करने की पुष्टि की है। पीजी प्रथम, द्वितीय व तृतीय वर्ष का स्टायपेंड क्रमश: 65 हजार, 67 हजार व 69 हजार करने की मांग जूडा ने की थी।

उधर, भविष्य में हड़ताल रोकने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। हड़ताल के बाद अत्यावश्यक सेवा प्रबंधन अधिनियम (एस्मा) लागू होने के 24 घंटे के भीतर काम पर नहीं लौटने वाले स्वशासी कर्मचारियों व फैकल्टी को बर्खास्त कर दिया जाएगा।

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया ने सभी मेडिकल कॉलेजों की स्वशासी समितियों को नियमों में बदलाव करने को कहा है। जीएमसी में शुक्रवार को नियम बदल दिए गए हैं। सातवें वेतनमान की मांग को लेकर स्वशासी कर्मचारी, स्टायपेंड बढ़ोतरी की मांग लेकर जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार सभी मेडिकल कॉलेजों में हड़ताल शुरू कर दी थी। सभी कॉलेजों में स्वशासी कर्मचारी बुधवार-गुरुवार को काम पर लौट आए थे। अब जूडा ने भी हड़ताल खत्म कर दी है। जूडा की हड़ताल रोकने के लिए अगले साल से बांड लागू करने की तैयारी है। दाखिले के वक्त छात्र को शपथ पत्र देना होगा कि हड़ताल की तो 10 लाख जमा करेंगे।

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