बैतूल में सेना की स्पेशल ट्रेन में लगी आग, 4 वाहन समेत सामान खाक

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बैतूल। सेना की एडी रेजीमेंट के डेढ़ सौ अफसर और जवानों के साथ ट्रक व सामान लेकर बेंगलुरू से फैजाबाद जा रही सेना की स्पेशल ट्रेन में बैतूल जिले के मरामझिरी स्टेशन के पास अज्ञात कारणों से आग लग गई। ट्रेन में सवार जवानों को जब तक भनक लगती उससे पहले ही 4 ट्रक समेत अन्य सामग्री जलकर खाक हो गई।
सेना के अफसरों और जवानों ने सतर्कता बरतते हुए मालगाड़ी के उन डिब्बों को अलग किया जिसमें छोटी तोप, हथियार और ज्वलनशील पदार्थ भरा हुआ था। बैतूल से पहुंची 4 दमकलों और सेना के जवानों ने मिलकर आग पर काबू पाया। इस घटना के कारण नई दिल्ली-चेन्न्ई रेल मार्ग के अप ट्रैक पर यातायात बाधित हो गया, जो देर शाम तक चालू नहीं हो सका था। हालांकि दिल्ली- नागपुर डाउन ट्रैक पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
बैतूल से 13 किमी की दूरी पर नई दिल्ली-चेन्न्ई रेल मार्ग के अप ट्रैक पर मरामझिरी स्टेशन के समीप मालगाड़ी के इंजन से जुड़ी पहले और दूसरे डिब्बे में खड़े किए ट्रकों में दोपहर करीब 12.10 पर आग लग गई। चलती ट्रेन में आग लगने के बाद 7 वें और 8 वें डिब्बे में खड़े ट्रकों भी आग लग गई। ट्रेन के चालक ने जैसे ही ट्रकों में आग की लपटें देखी तत्काल ही टनल (सुरंग) क्रमांक 5 के पास ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी। सेना के जवानों ने तत्काल ही मौके पर पहुंचकर अपने पास मौजूद संसाधनों से आग पर काबू पाने की कवायद शुरू कर दी और हथियार और विस्फोटक से भरे डिब्बों को अलग कर दूसरे इंजन के सहारे दूर ले जाकर खड़ा कर दिया। 36 डिब्बों की इस मालगाड़ी में छोटी तोपें भी रखी थीं।
फर्नीचर और दस्तावेज हुए राख
एडी रेजीमेंट के मेजर सीपी सिंह ने बताया कि जो ट्रक आग लगने से राख हुए हैं उनमें फर्नीचर, दस्तावेज, टेंट एवं अन्य सामग्री रखी हुई थी। आग की लपटें और धुंआ देखते ही सभी जवान आग को काबू करने के लिए जुट गए थे। उन्होंने रेत और सीज फायर की मदद से आग को बढ़ने से रोकने में कामयाबी पाई। इस घटना के कारण अप और डाउन ट्रैक पर रेल यातायात देर शाम तक प्रभावित रहा।
सेना के जवान सतर्क न होते तो तबाह हो जाती टनल
शुक्र था कि आग केवल टनल के बाहर निकले डिब्बों में से 4 में लगी। इसके पीछे के 27 डिब्बों में से एक एसी कोच था जिसमें अधिकारी, कर्मचारी थे, कुछ में एम्युनेशन था तो अन्य में वाहन और अन्य सामग्री थी, यह सभी टनल के भीतर थे। यदि टनल के भीतर के किसी डिब्बे में आग लगती तो एक तो वहां बुझाने के प्रयास ही नहीं हो पाते और हवा के झोंकों से एक के बाद दूसरा डिब्बा चपेट में आता रहता और पूरी ट्रेन जल जाती। एम्युनेशन होने से विस्फोट भी हो सकता था और रेलवे की टनल को जबरदस्त क्षति पहुंचती। ऐसे में इस ट्रैक से यातायात बहाल करने में लम्बा समय लग सकता था। मिलेट्री स्पेशल ट्रेन में मरामझिरी और धाराखोह के बीच आग लगने से ओएचई लाइन भी टूट गई है। इससे अप ट्रैक पर दोपहर 12 बजे से यातायात पूरी तरह से ठप है।
ओएचई से आग लगने की आशंका
घटना की सूचना मिलने पर इटारसी से पहुंचे जीआरपी के डीएसपी एनके नाहर ने बताया कि प्रथम दृष्टया रेलवे के ओएचई में शार्ट सर्किट होने के कारण आग लगने की आशंका है। उन्होंने आशंका जताई कि किसी ट्रक में कोई नुकीली वस्तु मौजूद थी जो ओएचई से टकराई और उससे होने वाली स्पार्किंग से ट्रकों में आग लग गई। हालांकि इंजन से सटे 2 डिब्बों के बाद 4 डिब्बों को छोड़कर फिर 2 में आग कैसे लगी इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है।
4 घंटे में आग पर पाया काबू
घटना स्थल पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण दमकलों को पहुंचने का कोई रास्ता नही था। इस कारण आग पर काबू पाने में 4 घंटे का समय लग गया। सबसे पहले डिब्बे की आग बुझाने के लिए दमकलों के पाइप ही कम पड़ गए जिसके चलते सेना के जवान आसपास से रेत एकत्र करते रहे और बाल्टियों से पानी ले जाकर आग बुझाने में जुटे रहे। आग कम होने पर ट्रेन को पीछे ले जाकर दमकल के सहारे आग बुझाई गई।
जांच की जा रही है
ट्रेन में आग लगने की कोई एफआईआर सेना की ओर से दर्ज नहीं कराई गई है। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर जांच की जा रही है।
एनके नाहर, डीएसपी जीआरपी इटारसी







