FEATUREDमध्यप्रदेश

कुनो पालपुर में बब्बर शेरों की शिफ्टिंग का फार्मूला 13 मार्च को होगा तय

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद केंद्र और गुजरात सरकार मध्यप्रदेश के कुनो पालपुर (श्योपुर) में एशियाटिक लॉयन (बब्बर शेर) की शिफ्टिंग को लेकर आगे की कार्यवाही करने के लिए तैयार हो गई है। केंद्र सरकार ने 13 मार्च को दिल्ली में बैठक बुलाई है। इसमें शेरों की शिफ्टिंग की रणनीति तय होगी। बैठक में मप्र-गुजरात और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारी शामिल होंगे।

आरटीआई एक्टिविस्ट और वन्यप्राणियों के जानकार अजय दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन न करने पर अवमानना याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 15 अप्रैल 2013 के फैसले का पालन किया जाएगा।

सरकार के वकील ने बताया कि 13 मार्च को शेरों की शिफ्टिंग को लेकर बैठक बुलाई है। इस जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और गुजरात सरकार को थमाया अवमानना का नोटिस खारिज कर दिया। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2013 में आए कोर्ट के फैसले के मुताबिक केंद्र और गुजरात सरकार को फैसला आने के छह माह के भीतर शेर भेजने थे।

क्या है मामला

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक दोनों सरकारों को अक्टूबर 2013 तक मध्य प्रदेश को शेर देने थे, लेकिन समयसीमा में शेरों की शिफ्टिंग की तैयारी भी शुरू नहीं हुई तो आरटीआई एक्टिविस्ट दुबे ने जून 2014 में केंद्र और गुजरात सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका लगाई थी। 14 नवंबर 2017 को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोनों सरकारों को अवमानना नोटिस जारी किया था।

27 साल से उलझा है मामला

केंद्र सरकार ने एशियाई शेरों को महामारी जैसी स्थिति से बचाने के लिए वर्ष 1991 में उन्हें दूसरे राज्यों में शिफ्ट करने की योजना बनाई थी। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून ने इसके लिए कुनो पालपुर के वातावरण को शेरों के अनुकूल बताया था। इसके आधार पर वर्ष 1993 में कुनो में शेरों की शिफ्टिंग का निर्णय लिया गया। वहां से दो दर्जन गांव शिफ्ट किए गए। शेरों की शिफ्टिंग के लिए बनाई गई विशेषज्ञों की समिति ने भी शिफ्टिंग की जरूरत बताई है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button