BOI में लाखों का फर्जीवाड़ा करने वाले पूर्व बैंक मैनेजर और सहयोगी को 7-7 साल की जेल, CBI कोर्ट का बड़ा फैसला

BOI में लाखों का फर्जीवाड़ा करने वाले पूर्व बैंक मैनेजर और सहयोगी को 7-7 साल की जेल, CBI कोर्ट का बड़ा फैसला

BOI में लाखों का फर्जीवाड़ा करने वाले पूर्व बैंक मैनेजर और सहयोगी को 7-7 साल की जेल, CBI कोर्ट का बड़ा फैसला

भोपाल: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया (BOI) में हुए एक बड़े वित्तीय घोटाले में अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने बैंक की मिसरोद शाखा के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक पीयूष चतुर्वेदी और उनके सहयोगी मोहन सिंह सोलंकी को धोखाधड़ी और गबन का दोषी पाया है। कोर्ट ने दोनों दोषियों को सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही दोनों पर 60-60 हजार रुपये का जुर्माना (अर्थदंड) भी लगाया है।BOI में लाखों का फर्जीवाड़ा करने वाले पूर्व बैंक मैनेजर और सहयोगी को 7-7 साल की जेल, CBI कोर्ट का बड़ा फैसला

साल 2016 में सीबीआई ने संभाली थी जांच

यह पूरा मामला करीब एक दशक पुराना है। बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन आंचलिक उप प्रबंधक ने इस वित्तीय अनियमितता को पकड़ने के बाद इसकी शिकायत देश की शीर्ष जांच एजेंसी से की थी। शिकायत के आधार पर 25 जनवरी 2016 को सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

फर्जी RTGS और वाउचर के जरिए ट्रांसफर किए 22 लाख रुपये

सीबीआई की जांच और अदालत में पेश किए गए सबूतों से यह साफ हो गया कि बैंक के भीतर ही बैठकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया गया था।

अदालत ने माना पद का दुरुपयोग, खारिज हुईं दलीलें

सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने अदालत में अकाट्य दस्तावेज और गवाह पेश किए, जिससे यह साबित हुआ कि जनता के पैसों की सुरक्षा करने वाले बैंक अधिकारी ने ही नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय संस्था के साथ गद्दारी की।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि बैंकिंग प्रणाली में इस तरह का फर्जीवाड़ा न केवल अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि आम जनता का बैंकिंग सिस्टम से भरोसा भी उठाता है। अपराध की गंभीर प्रकृति को देखते हुए अदालत ने दोषियों के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई और दोनों को सीधे जेल भेजने के आदेश जारी कर दिए।BOI में लाखों का फर्जीवाड़ा करने वाले पूर्व बैंक मैनेजर और सहयोगी को 7-7 साल की जेल, CBI कोर्ट का बड़ा फैसला

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