मध्यप्रदेश

23 सालों से 32 गांव के किसान झेल रहे करैरा अभ्यारण्य का दंश

करैरा। करैरा विधानसभा के 32 गांव पिछले 23 सालों से करैरा अभ्यारण्य का दंश झेल रहे हैं। इस प्रतिबंध के लगे होने से इन गांवों के किसान अपनी जमीन के मालिकाना हकदार होने के बाद भी जरुरत पड़ने पर न जमीन खरीद सकते है और न ही बेच सकते हैं। हर बार के लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में यह मुद्दा काफी तूल पकड़ता है, लेकिन हर बार नेताओं द्वारा केवल दिलाशा दिया जाता है और कोई कुछ नहीं कर पाता है।

402 वर्ग किलोमीटर में बसा अभ्यारण्य

करैरा अभ्यारण्य की सीमा ग्राम लंगूरी से लगती है जो 402 वर्ग किमीके क्षेत्र बसा हुआ है जिसमें अभ्यारण्य की स्वयं की कोई जमीन नहीं है ज्यादातर जमीन किसानों की एवं कुछ रेवेन्यू की है। इन 32 गांव में रावत और जाटव बघेल समाज की संख्या ज्यादा है लगभग 80 हजार वोटर है। ग्रामीण राजेन्द्र रावत, वनमाली रावत, हरनायरण पांडेय, ग्राम भैसा के पंजाव रावत, रौनीजा के जगदीश रावत, दिहायला जरगवा सानी नवाव रावत, हाकिम रावत, परमार सहित हजारों किसानों को इस अभ्यारण्य के खत्म न होने से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

रेत के बने है जगह जगह घाट

करैरा अभ्यारण्य में दो दर्जन से ज्यादा रेत के घाट बने हुए है जैसे सिलरा, अंदौरा, दिहायला, सुनारी, भासडा खुर्द, रौनीजा, नेकौरा, जरगवा, सानी राय, पहाड़ी, बरसौड़ी, लमकना फतेहपुर, खड़ीचा बहगवा, धमधौली आदि कई गांव है जहां पर रेत करोड़ो की है ।

इनका कहना

इस मुद्दे को मैने पिछली विधान सभा सत्र में उठाया था। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई केबल आश्वासन दिया जाता है और कुछ नहीं ।

शकुंतला खटीक, विधायक करैरा

पांच छह माह में आएंगे अच्छे परिणाम

यह कोई पार्टी का विषय नहीं है इसके लिए सांसद से बात की है उसमे भारत सरकार ने विचार करके उसको खत्म करने के लिए जो प्रोसेसिंग होती है। उसके लिए सुप्रीम कोर्ट से सहमति लेना पड़ती है वह सभी प्रोसेसिंग में है। मुझे लगता है कि यह करैरा अभ्यारण्य जल्द खत्म होगा उसमे पार्टी वाला मुद्दा नहीं है। राज्य सरकार प्रस्ताव बनाकर देती है फिर भारत सरकार को जाता है वह कैविनेट में रखती है और सुप्रीम कोर्ट से सहमति लेती है जल्द से जल्द यह खत्म होगा । 5 से 6 माह में अच्छे परिणाम आएंगे ।

रणवीर सिंह रावत, भाजपा किसान मोर्र्चा के प्रदेश अध्यक्ष

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

Leave a Reply