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RBI डाटा से खुलासा, 5 सालों में बैंकों से हुआ 61,260 करोड़ रुपए का फ्रॉड

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मुम्बई। अरबपति जूलर्स द्वारा भारत के दूसरे सबसे बड़े बैंक (पंजाब नैशनल बैंक) को 11,300 करोड़ रुपए की चपत लगाए जाने की खबर से निवेशकों को बड़ा धक्का लगा लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ  इंडिया (आर.बी.आई.)के आंकड़ों से पता चलता है कि यह समस्या इससे कहीं अधिक बड़ी है।
सूचना के अधिकार कानून के तहत मिली जानकारी के मुताबिक 31 मार्च 2017 तक पिछले 5 सालों में सरकारी बैंकों ने 8,670 लोन फ्रॉड की जानकारी दी और इन्हें कुल 61,260 करोड़ रुपए का चूना लगा। भारत में लोन फ्रॉड उन केसों को कहा जाता है जहां ऋणधारक जानबूझकर बैंकों को धोखा देता है और बैंक को लोन नहीं चुकाता है। आंकड़े बताते हैं कि फंसे कर्ज के बोझ तले दबे बैंकिंग सैक्टर की समस्या कितनी बड़ी है। बैंकों के फंसे कर्ज का स्तर पिछले साल 149 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
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बैंक लोन फ्रॉड में तेजी से वृद्धिहुई है। वित्त वर्ष 2012-13 में यह 6,357 करोड़ रुपए की लोन जालसाजी की गई तो मौजूदा वित्त वर्ष में यह 17,634 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि इसमें पी.एन.बी. केस की रकम को शामिल नहीं किया गया है। देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पी.एन.बी. ने कहा कि इसके दो जूनियर अधिकारियों ने एक ब्रांच से अवैध रूप से कम्पनियों को 11,300 करोड़ रुपए के लोन दिए। इनमें से अधिकतर पर जूलर नीरव मोदी का नियंत्रण है। यह भारत का सबसे बड़ा बैंक फ्रॉड है।

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