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10 साल पहले सीधे SI बने पुलिस अधिकारियों को दे दी पदोन्नति, 30 से 40 साल तक सेवा करते उपनिरीक्षक के पद तक पहुंचे पुलिस अधिकारियों की टूटी आस

कटनी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पहले ही आदेश में कहा था सब इंस्पेक्टर्स के प्रमोशन 15 दिन में हो जाने चाहिए, इसलिए विभागीय स्तर पर इसमें तेजी दिखाई गई और 465 उपनिरीक्षकों की फिट लिस्ट जारी करने के बाद 283 उपनिरीक्षकों को कार्यवाहक निरीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया लेकिन इस सूची के जारी होने के बाद वो उपनिरीक्षक अपने आपकों को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

सिपाही व हवलदार से भर्ती होने के बाद पदोन्नति का लाभ लेते हुए उपनिरीक्षक तक पहुंचे हैं और उन्हे भी मुख्यमंत्री मोहन यादव के आदेश के बाद पदोन्नति मिलने की आस थी। ऐसे उपनिरीक्षकों की संख्या 167 के लगभग है, जो सिपाही व हवलदार से पुलिस विभाग में भर्ती हुए और 30 से 40 साल की सेवा के दौरान पदोन्नत होकर उपनिरीक्षक के पद तक पहुंचे हैं।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने नए साल से पहले पुलिसकर्मियों को प्रमोशन का तोहफा दिया था। जिसमें पुलिस विभाग के 283 उपनिरीक्षकों को कार्यवाहक निरीक्षक बनाया गया है। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय से आदेश जारी होने के बाद संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने पदोन्नति का लाभ पाने वाले उपनिरीक्षकों के कंधे पर तीसरा स्टार लगाकर उन्हे कार्यवाहक निरीक्षक भी बना दिया है।

पुलिस सूत्रों की माने तो अभी जिन उपनिरीक्षकों को पदोन्नति का लाभ मिला है वो महज 10 साल पहले उपनिरीक्षक के पद पर सीधे भर्ती हुए थे। वहीं विभाग के द्धारा पदोन्नति के लिए जारी की गई 465 की फिट लिस्ट में 167 उपनिरीक्षक ऐसे थे जो सिपाही, हवलदार व सहायक उपनिरीक्षक के पद पर 30 से 40 साल पहले विभाग में भर्ती हुए और पदोन्नति का लाभ पाते हुए उपनिरीक्षक के पद तक पहुंचे हैं।

इन्हे भी मुख्यमंत्री मोहन यादव के आदेश के बाद पदोन्नति का लाभ मिलने की उम्मीद थी लेकिन सूची जारी होने के बाद ये सभी उपनिरीक्षक अपने आपकों का ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मप्र पुलिस मुख्यालय ने 465 सब इंस्पेक्टर्स की एक फिट लिस्ट जारी की थी और पहले चरण में 465 की फिट लिस्ट में से 283 को उपनिरीक्षक से कार्यवाहक निरिक्षक बनाया गया है। आगे अब विभाग बाकी बचे पुलिसकर्मियों में से आवश्यकता के हिसाब से कार्यवाहक इन्स्पेक्टर के पद पर पदोन्नत किया जाएगा लेकिन शेष बचे उपनिरीक्षकों में से 167 उपनिरीक्षक डिपार्टमेंट वाले थे परंतु पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा 30 दिसंबर को डायरेक्ट उपनिरीक्षक जिनकी नौकरी 10 वर्ष की हुई है उनकी लिस्ट जारी कर दी गई और टीआई बना दिया गया परंतु जिनकी 30, 40 साल की सेवाकाल में सिपाही से उपनिरीक्षक बने 167 उपनिरीक्षक को निरीक्षक नहीं बनाया गया।

जिससे सिपाही से बने उपनिरीक्षक के पद तक पहुंचे पुलिस अधिकारियों को काफी निराशा हुई है। ऐसे उपनिरीक्षकों को अपने परिवार, दोस्तों व समाज में अपमान का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कुछ उपनिरीक्षकों की नौकरी एक या दो माह बची है और वो रिटायरमेंट की कगार पर हैं। उनका सोचना है कि तीन स्टार लगने के बाद उनकी सेवानिवृत्ति होती तो एक अलग मैसेज विभाग व समाज में जाता। ऐसेे सभी उपनिरीक्षकों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव व डीजीपी का ध्यान इस ओर आकर्षित कराते हुए अविलंब पदोन्नति का लाभ दिए जाने की मांग की है।

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