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‘हिन्दुत्व’ कार्ड से गुजरात फतह करने की तैयारी में राहुल की कांग्रेस

नई दिल्‍ली। पिछले 20 सालों से गुजरात में हाशिए पर खड़ी कांग्रेस के लिए ये चुनाव करो या मरो की स्थिति वाले है। अगर कांग्रेस इस बार चुनाव नहीं जीत पाई तो गुजरात में उसके अस्तित्व पर ही सवाल खड़े हो जाएंगें। यही वजह है कि जिस हिन्दुत्व के नाम पर अबतक बीजेपी लोगों से वोट मांगती रही थी, उसी हिन्दुत्व के नाम पर पहली दफा कांग्रेस भी अपना दांव खेलने जा रही है।

वोटो का ध्रुविकरण न हो इसलिए पटेल को रखा दूर
कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जब सौराष्ट्र का रोड शो शुरु किया तो पहले द्वारकाधीश के दर्शन किए फिर चोटीला में मां चामुंडा के दर्शन के साथ-साथ दूसरे दौरे में मध्य गुजरात में संतराम मंदिर, भाथीजी मंदिर तक में माथा टेक आए। अगर राजनीतिक जानकारों की मानें तो अहमद पटेल भी इस बार गुजरात चुनाव से पुरी तरह दूर हैं। ताकि हिन्दु मुस्लिम के नाम पर बीजेपी को राजनीति करने का कोई मौका ना मिले। विकास के नाम पर जहां बीजेपी राजनीति कर गुजरात में आगे बढ़ नहीं पा रही है तो उसी विकास को कांग्रेस ने गुजरातियों के सामने पागल करार दे दिया। जबकि इसी विकास को चुनावी मुद्दा बनाकर भाजपा और नरेन्द्र मोदी ने 2007 और 2012 में जीत दर्ज की थी।

मोदी के विकास का शिकार अपने आप को मानते हैं युवा
गुजरात को बीजेपी का हिन्दुत्व का प्रयोग स्थल कहा जाता है। 2002 के दंगों के बाद से शुरु हुआ हिन्दुत्व का नारा और मोदीयुग की शुरुआत हुई थी। यही कट्टर हिन्दुवादी छवि बाद में विकास पुरुष के मेकओवर के जरीए बदलने लगी। एेसे में जिस विकास की बात नरेन्द्र मोदी करते हैं, उस विकास का सबसे ज्यादा शिकार गुजरात के युवा अपने आप को मानते हैं, जिसमें बेरोजगारी, शिक्षा का निजीकरण, किसानों की आत्महत्या, फसल के सही दाम ना मिलना जैसे प्रमुख मुद्दे हैं। यही वजह है कि राज्य की तीनी बड़ी जातियों से ताल्लुख रखने वाले युवा नेता भी इन्हीं मुद्दों पर लंबे समय से भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।

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