हमारे बच्चे कोई टेस्टिंग किट थोड़ी ना है, स्कूल जाने को लेकर डरा अभिभावक!

हमारे बच्चे कोई टेस्टिंग किट थोड़ी ना है,
स्कूल जाने को लेकर डरा हुआ है शहर का अभिभावक!
जबलपुर। स्कूल खोलने से पहले संसद ,विधानसभा , दर्शकों से भरा स्टेडियम, शॉपिंग ,मॉल ,सिनेमा घर, बाजार यह सब पहले खोलें तू ही स्कूल खोले जाएं वरना हम बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे, हमारे बच्चे कोई टेस्टिंग किट के थोड़ी ना है ऐसा कहना है शहर के पेरेंट्स का । यह सारी बातें इस समय सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहे हैं अभिभावकों की मन में एक डर है क्या अभी बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित रहेगा कि नहीं और अगर बच्चे स्कूल जाते हैं और वहां पर संक्रमण धोखे से भी फैल गया तो इसकी जवाबदारी कौन लेगा, इन्हीं बातों को लेकर यश भारत द्वारा कुछ पेरेंट्स से संपर्क किया गया और एक छोटा सा सर्वे संपन्न कराया गया जिसके तहत बहुत ही कम अभिभावक यह चाहते हैं कि अभी बच्चे स्कूल जाएं।
चार चरण के लॉकडाउन का स्कूली बच्चों के परिजनों पर काफ़ी असर पड़ा है. असर ऐसा है कि अगर स्कूल खुलते हैं तो ये परिजन अपने बच्चों को तुरंत पढ़ने नहीं भेजेंगे. स्कूल खुलने के बाद बच्चों को तुरंत पढ़ने नहीं भेजने वाले परिजनों की संख्या 92 प्रतिशत है, वहीं 56 प्रतिशत कम से कम एक महीने तक हालात का जायज़ा लेने के बाद फ़ैसला करेंगे.
बातें पेरेंट सर्कल द्वारा किए गए एक सर्वे में निकलकर सामने आई हैं. इस देशव्यापी सर्वे में बच्चों के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर परिजनों की राय ली गई है. जिन पहलुओं पर राय ली गई है उनमें बच्चों को स्कूल भेजना, दूसरों के साथ खेलने देना, बर्थडे पार्टी मनाना, मॉल-फिल्म या फैमिली वोकेशन पर जाना जैसी बातें शामिल हैं.
सवालों के जवाब में परिजन काफ़ी आशंकाओं से घिरे नज़र आए. मार्च में ज़्यादातर शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया था. लंबा समय बीत जाने के बाद भी परिजन बच्चों को दोबारा से पढ़ने भेजने को लेकर ज्यादा उत्सुक नहीं हैं. बच्चों को स्कूल भेजने से पहले वो इसे लेकर आश्वस्त होना चाहते हैं कि कोविड को लेकर स्थिति पूरे कंट्रोल में है.
क्या बच्चों को पार्टी में जाने देंगे उनके माता-पिता
बच्चों के जीवन से जुड़े जिन पहलुओं का इस सर्वे में पता लगाने की कोशिश की गई है उनमें बर्थडे पार्टी को लेकर भी परिजनों की राय ली गई है. 64 प्रतिशत का कहना है कि वो अपने बच्चों को 2020 में किसी बर्थडे पार्टी में नहीं जाने देंगे. इसकी इजाज़त सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने की स्थिति में भी नहीं दी जाएगी.
ना सिर्फ बर्थडे पार्टी बल्कि 1 प्रतिशत से अधिक परिजन इसके लिए भी नहीं तैयार कि लॉकडाउन खुलने के बाद वो अपने बच्चों को तुरंत मॉल घुमाने या मूवी दिखाने ले जाएं. 50 प्रतिशत तो पूरे साल के लिए किसी मॉल या मूवी को सिरे से अपने जीवन से दूर रखने की तैयारी में हैं.
बच्चों के बाहर खाने पर क्या सोचते हैं पेरेंट्स
बाहर खाने जाने को लेकर राय बंटी हुई है. परिजनों का कहना है कि अगर साफ़ सफ़ाई और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का ठीक से पालन किया जाता है तो वो बाहर खाने जाने को तैयार हैं. हालांकि, यहां भी पूरे साल ऐसा नहीं करने वाले परिजनों का औसत 49 प्रतिशत है, वहीं 33 प्रतिशत ऐसे हैं जो शुरुआती 3 महीने के बाद बाहर खाने की सोच सकते हैं.
बच्चों की दोस्ती और खेल पर भी पड़ेगा असर
बच्चों के जीवन में दोस्ती और खेल बेहद अहम होते हैं. लेकिन कोरोनावायरस के प्रकोप ने ऐसी चीज़ों को भी नहीं बख़्शा है. परिजनों के ज़ेहन में ऐसा संशय है कि अगर लॉकडाउन के नियमों में ढील दे दी जाती है तो भी वो ना तो तुरंत अपने बच्चों को दोस्तों से ही मिलने देेंगे, ना ही उन्हें तुरंत खेलने भेजेंगे.
50 प्रतिशत ऐसे परिजन हैं जो अपने बच्चों को लॉकडाउन खुलने के बाद भी एहतियातन घर में रखेंगे. हालांकि, 35 प्रतिशत ऐसे भी हैं जो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए जाने की स्थिति में बच्चों को पार्क में खेलने भेजने को तैयार हैं.








