पुलिस का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए हिंसा तेजी से फैलती है. दलित आंदोलन के पीछे भी सोशल मीडिया को दोषी ठहराया
दलित आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा से सबक लेते हुए पुलिस मुख्यालय ने अब सोशल मीडिया को लेकर पहली बार मॉनीटरिंग सेल बनाई है. साथ ही गाइडलाइन जारी की गई है, जिसमें पुलिस ने सूचना देकर कार्रवाई के प्रावधान को बताया गया है.
दलित आंदोलन से फैली हिंसा को कंट्रोल करने में नाकाम रही एमपी पुलिस ने अब आम जनता से अपील करते हुए गाइडलाइन जारी की है. पुलिस का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए हिंसा तेजी से फैलती है. दलित आंदोलन के पीछे भी पुलिस अधिकारियों ने सोशल मीडिया को दोषी ठहराया था. 10 अप्रैल को होने वाले आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट को लेकर भी पुलिस अलर्ट है.
-किसी भी व्यक्ति और वर्ग विशेष के खिलाफ पोस्ट करने वालों पर नजर
-सोशल मीडिया पर धार्मिक उन्माद और साम्प्रदायिक द्वेश फैलाने वाला पर कार्रवाई
-वीडियो, मैसेज के साथ किसी भी तरह की आपत्तिजनक पोस्ट पर रोक
-साइबर सेल के दायरे में संदिग्ध फेसबुक प्रोफाइल और व्हाटसएप्प ग्रुप
-व्हाटसएप्प ग्रुप एडमिन की सदस्यों को समझाइश देने की जिम्मेदारी
-ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान
-शासन की योजनाओं से वंचित करने की कार्रवाई
दलित आंदोलन में हिंसक घटनाओं के बाद सोशल मीडिया को लेकर पुलिस अलर्ट हो गई है. सोशल मीडिया पर पुलिस की पैनी नज़र है. पुलिस ने सोशल मीडिया पर नज़र रखने के लिए हर जिले पर मॉनीटिरिंग सेल भी बनाई है.
भोपाल पुलिस ने आपत्तिजनक पोस्ट डालने वालों पर कार्रवाई करना भी शुरू कर दिया है. व्हाटसएप ग्रुप का एडमिन किसी भी वायरल पोस्ट के लिए जिम्मेदार होगा.
एसपी साउथ राहुल कुमार लोढा ने बताया कि भोपाल पुलिस ने कई संगठनों के लोगों को चिन्हित कर उनसे पूछताछ भी की है. कोई व्यक्ति जनता को भड़काने या दो समुदाय के मध्य वैमनस्यता का वातावरण निर्मित करने वाली पोस्ट किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जारी करता है या शेयर या लाइक करता है तो उसके खिलाफ धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी.

